Dunub Epill ka khagoleey vishleshan
🌟दुन्हुब इपिल्ल, कोल हो समाज की पूजा, दिशा और जीवन दर्शन का आकाशीय मूल-केंद्र।
🌟दुन्हुब इपिल्ल (ध्रुव तारा):- रात्रि आकाश में असंख्य तारे दिखाई देते हैं, परन्तु उनमें से एक तारा ऐसा है जो हमेशा लगभग एक ही स्थान पर स्थिर दिखाई देता है। हो समाज में इसे दुन्हुब इपिल्ल कहा जाता है और हिन्दी में इसे ध्रुव तारा या उत्तर तारा कहा जाता है। यह तारा दिशा निर्धारण, सांस्कृतिक मान्यताओं, पुजा स्थापन, और यात्रा मार्गदर्शन में विशेष महत्व रखता है।
दुन्हुब (केन्द्र / धुरी) + इपिल्ल (प्रकाशयुक्त तारा)
जो आकाश में स्थिर प्रकाश से दिशा बताता है।
🌟दुन्हुब — शब्दार्थ
दुन्हुब का सामान्य अर्थ:- केन्द्र, बैठक, स्थिर स्थान, घूमने की धुरी, दिशा का मूल बिंदु, हो समाज में यह शब्द उस बिंदु को दर्शाता है जहाँ से मार्गदर्शन और केंद्र-निर्देश शुरू होता है।
दुन्हुब का वारङ चिति लिपि में अक्षर-विचार
🌟दुन्हुब — अक्षरार्थ
द:+यु:+नुङ+ह्यो+यु:+बू = दुन्हुब
अक्षर = अर्थ
द: = पानी, द्वीप, संगम, पृथ्वी से संबंध
यु: = झुकाव, भार, खिंचाव
नुङ = अण्डा, घूमने वाला, सूक्ष्म, लट्टू
ह्यो = रस्सी, गतिशीलता, हवा, क्रियाशीलता
बू = ढंकना, गोल, अंदर रखना, आवरण
द्वीप+झुकाव+घुमने वाला+क्रियाशील+झुकाव+गोल
पृथ्वी पर झुकाव और घूमने की क्रियाशील शक्ति वाला गोलाकार स्थिर केंद्र। यह अर्थ पृथ्वी की धुरी और ध्रुव बिंदु से मेल खाता है।
🌟इपिल्ल् क्या है?
इपिल्ल् हो भाषा में तारा को कहा जाता है — वह आकाशीय वस्तु जो रात में स्वयं चमकती है। सरल शब्द में: इपिल्ल् = रात में चमकने वाला प्रकाश स्रोत।
यह पृथ्वी पर दिशा बताने, जीवन-चक्र समझने और सांस्कृतिक अनुष्ठानों में मार्गदर्शक का काम करता है।
इपिल्ल् दो शब्दों से मिलकर बना है:
इपिल्ल् = इपि + ल्ल्
इपि = चमक, रोशनी
ल्ल् = निकालना, प्रकट करना
यहाँ ल् ध्वनि का द्वित्व हुआ है: इपि + ल् → इपि + ल्ल् = इपिल्ल्। अर्थ: जो स्वयं प्रकाश निकालता है — यानी तारा।
इपिल्ल् का वारङ चिति लिपि में अक्षर-विचार
🌟इपिल्ल् — अक्षरार्थ
इ + पुउ: + वि:इ + ह्लो + ह्लो = इपिल्ल्
अक्षर = अर्थ
इ = जीव, जन्तु, आयु, उत्पत्ति
पुउ: = रक्षक, संरक्षक, पालनकर्ता, कोष
वि:इ = प्राण-वायु, अंकुर, ऊर्जा, केन्द्र
ह्लो = शांति, जीवन, कार्य, निरंतरता
ह्लो = (दोबारा) पुनरावृत्ति → अनंत निरंतर क्रिया
जीव+रक्षक+प्राण वायु+कार्य+कार्य
जीवों की रक्षा करने वाली, प्राण ऊर्जा देने वाली, निरंतर प्रकाश और जीवनधारा से चमकने वाली शक्ति।
दुन्हुब = स्थिर केंद्र/धुरी
इपिल्ल् = प्रकाश देने वाला तारा
दुन्हुब इपिल्ल वह तारा है जो पृथ्वी की धुरी के ऊपर स्थिर दिखाई देता है और दिशाओं का निर्धारण करता है।
यानी ध्रुव तारा (North Star)
🌟हो समाज में सांस्कृतिक महत्व
पुजा में उत्तर दिशा की ओर मुख करना
क्योंकि उत्तर दिशा दुन्हुब इपिल्ल की दिशा मानी जाती है।
पूर्व = सूर्य (जीवन ऊर्जा)
पश्चिम = चंद्र (शीतलता, विश्राम)
उत्तर = दिव्य केंद्र (धुरी + प्रकाश)
जीवन संतुलन का प्रतीक
सूर्य (ऊर्जा) + चंद्र (शीतलता) + दुन्हुब (स्थिरता)
आत्मिक दिशा-निर्देशक, इसे आत्मा का मार्गदर्शन देने वाला प्रकाश माना जाता है।
🌟यात्रा और दिशा निर्धारण
दुन्हुब इपिल्ल प्राचीन काल से:- जंगल में दिशा पहचान, पर्वत मार्ग, गाँवों के बीच दूरी अनुमान, रात में यात्रा, युद्धकाल में गमन-मार्ग तय .
समुद्र में उपयोग :- मछुआरे (माला / मछवारा) समुद्र में नाव चलाते समय उत्तर दिशा जानने के लिए दुन्हुब इपिल्ल को देखते थे। जहाँ कम्पास नहीं था, तारा ही दिशा का मार्गदर्शक था।
🌟वैज्ञानिक दृष्टिकोण :- ध्रुव तारा पृथ्वी के उत्तरी ध्रुव की दिशा में स्थित है। पृथ्वी घूमती है → तारे बदलते हैं
पर ध्रुव तारा लगभग स्थिर दिखाई देता है क्योंकि वह पृथ्वी की घूर्णन धुरी के सीध में है। दूरी बहुत अधिक आकाश में स्थान लगभग नहीं बदलता
इसलिए यह “स्थिर” लगता है
🌟आध्यात्मिक और दार्शनिक अर्थ
मनुष्य के जीवन में एक स्थिर लक्ष्य होना चाहिए
जैसे आकाश में दुन्हुब इपिल्ल।
प्रकाश वह है जो मार्ग दिखाए, पर बाध्य न करे
अंधकार में आशा का प्रतीक
दुन्हुब इपिल्ल केवल एक तारा नहीं था, यह दिशा, समय, ऋतु, खेती, यात्रा और पूजा का आधार था। हमारे पूर्वज रात के आकाश को देखकर मौसम, दूरी और दिशा का अनुमान लगाते थे। इससे स्पष्ट होता है कि हो समाज के पूर्वज केवल सांस्कृतिक रूप से नहीं बल्कि खगोलीय (Astronomical) दृष्टि से भी अत्यंत विकसित थे। आधुनिक भाषा में कहें तो वे एक प्रकार के भूगोलवेत्ता और खगोलवेत्ता थे, जो प्रकृति और आकाश के नियमों को वैज्ञानिक रूप से समझते थे।
