Chandu ka prakriti aur vaigyanik vishleshan
चांडु: (चाँद) का प्रकृति एवं वैज्ञानिक विश्लेषण
हो भाषा में चाँद को “चांडु:” कहा जाता है। यह शब्द दो मूल घटकों से मिलकर बना है
चां = फैला हुआ, छाया हुआ 🌕
अडो: = खोना, लुप्त होना 🌑
👉 संयुक्त अर्थ :- चांडु: वह खगोलीय पिंड है जो आकाश में प्रकाश फैलाता है, लेकिन समय के साथ उसका प्रकाश घटता-बढ़ता और अंततः खोता हुआ प्रतीत होता है। यह अर्थ सीधे-सीधे चंद्र कला (Moon Phases) के वैज्ञानिक सिद्धांत से मेल खाता है।
❤️चाँद का वैज्ञानिक स्वरूप (Scientific Identity)
चाँद पृथ्वी का एकमात्र प्राकृतिक उपग्रह है इसमें स्वयं का प्रकाश नहीं होता। यह सूर्य के प्रकाश को परावर्तित करके चमकता है
👉 इसलिए “चां = फैला हुआ प्रकाश
👉 “अडो: = प्रकाश का खोना
वैज्ञानिक रूप से पूर्णतः सत्य है।
🌓🌕🌗🌑चंद्र कलाएँ और “समय खोना”
वैज्ञानिक रूप से चाँद के प्रकाश के घटने-बढ़ने को कहते हैं
शुक्ल पक्ष = चांडु: मुलु: – पोनइ (चंद्र दर्शन – पुर्णिमा)
कृष्ण पक्ष= केच: – निरसांदि (प्रतिपदा – अमावस्या)
यह पूरा चक्र लगभग 28, 29 दिन में पूरा होता है।
👉 यही कारण है कि हो भाषा में कहा गया जो समय के साथ खो जाती है” यह भाषिक दर्शन + खगोल विज्ञान का अद्भुत संगम है।
❤️वारङ चिति लिपि के अक्षरों का वैज्ञानिक अर्थ
चांडु: वारङ चिति लिपि में छः अक्षरों से बना है
विच+अ:+ङ्:+ओड्+यु:+य: = चांडु:
(1) च (विच) — बंधना, समूह, संग्रह
👉चाँद पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण से बंधा हुआ है
👉पृथ्वी-चंद्र प्रणाली एक खगोलीय समूह है
(2) अ-कार (अ्:) — शाम, रात, अंधकार
👉चाँद मुख्यतः रात में दिखाई देता है
👉यह रात्रि का प्राकृतिक प्रकाश स्रोत है
(3) अनुस्वार (ङ्:) — चमक, प्रकाश, प्रभा
👉चाँद सूर्य का प्रकाश परावर्तित करता है
👉इसलिए यह चमकता है, स्वयं नहीं जलता
(4) ड (ओड्) — कटना, कुदाल, तलवार
👉चंद्रमा की कलाएँ कटती-बढ़ती दिखाई देती हैं
👉यह दृश्य “कटने” जैसा प्रतीत होता है
(5) ह्रस्व उकार (यु:) — भारी, गिरने वाला
👉चाँद का गुरुत्वाकर्षण समुद्र में ज्वार-भाटा लाता है
👉यह “भारी प्रभाव” का संकेत है
(6) विसर्ग (य:) — डुबना, काला, प्रकाश का बंद
👉अमावस्या में चाँद डूबा हुआ या अदृश्य लगता है
👉यह प्रकाश का पूर्ण लोप है
❤️संयुक्त वैज्ञानिक अर्थ (Integrated Meaning)
बंधना + शाम + प्रकाश + कटना + भारी + डुबना
👉 वैज्ञानिक रूप में इसका अर्थ
चाँद पृथ्वी से बंधा हुआ है, शाम और रात में प्रकाश देता है, उसका प्रकाश घटता-बढ़ता है, पृथ्वी पर भारी प्रभाव डालता है, और अंततः अमावस्या में डूब जाता है। यह विवरण आधुनिक खगोल विज्ञान से पूर्णतः मेल खाता है।
हो भाषा का “चांडु:” शब्द केवल नाम नहीं है, यह चंद्रमा का संपूर्ण वैज्ञानिक व्यवहार अपने भीतर समेटे हुए है
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