Pudgal ka dhatuvyootpati aur vaigyanik vyakhya
पुदगल(प्रकृति) का धातु व्यूत्पति और वैज्ञानिक व्याख्या :- आदिवासी (कोल) हो’दर्शन में प्रकृति को केवल बाहरी पर्यावरण नहीं माना जाता, बल्कि उसे जीवन, शरीर, चेतना और परिवर्तन की समग्र व्यवस्था के रूप में देखा जाता है। इसी समग्रता को हो भाषा में “पुदगल” कहा गया है। पुदगल कोई जड़ वस्तु नहीं, बल्कि रक्षक पालक–परिवर्तनशील–शांत जीवनचक्र है।
हो’दर्शन की विशेषता यह है कि यहाँ भाषा, लिपि और दर्शन अलग नहीं हैं। वारङ चिति लिपि के अक्षर स्वयं में अर्थ, प्रक्रिया और विज्ञान को समाहित करते हैं। इसलिए “पुदगल” को समझने का सबसे प्रामाणिक माध्यम वारङ चिति लिपि ही है।
❤️वारङ चिति लिपि में “पुदगल” का अक्षरात्मक गठन
पुदगल = पुउ: + यु: + द: + गो: + ह्लो (कुल पाँच अक्षर)
अब प्रत्येक अक्षर को अक्षर नाम, अक्षरार्थ और भावार्थ सहित समझते हैं।
(1) प (पुउ:) = रक्षक, संरक्षक, पालनकर्ता, गुरु, रसोईघर, कोष, हांडी, गर्भाशय
भावार्थ:-पुउ: का मूल भाव संरक्षण और सृजन का केंद्र है। जैसे गर्भाशय जीवन को सुरक्षित रखता है जैसे रसोई जीवन का पोषण करती है
👉प्रकृति भी पुउ: है, क्योंकि वही सभी जीवों की माता और रक्षक है।
(2) ह्रस्व उकार (यु:) = अक्षरार्थ:-गिरने वाला, आपतित, भारी, वजनदार, झुकाव, बूंद, ओस, बारिश, शुक्राणु
भावार्थ:-यु: ऊपर से नीचे आने वाली शक्ति का प्रतीक है।
वर्षा का गिरना, ओस की बूंद, शुक्राणु का अंडाणु की ओर गिरना
👉यह ऊर्जा का अवतरण (Descent of Energy) है।
(3) द (द:) = पानी, कुल्ला करने वाला, संगम, द्वीप, सात महाद्वीप, अंडाणु
भावार्थ:-द: जल और संगम का प्रतीक है।
जल = जीवन
संगम = सृजन
द्वीप = स्थिर जीवन का आधार
अंडाणु = जीवन का बीज
👉यु: से गिरी ऊर्जा जब द: (जल) से मिलती है, तब जीवन का जन्म होता है।
(4) ग (गो:) = रूप बदलने वाला, परिवर्तन, आकृति बदलना, ढोना, लदना
भावार्थ:-गो: परिवर्तन (Transformation) का सिद्धांत है।
बीज → पौधा
पौधा → वृक्ष
शरीर → मृत्यु → तत्व
👉प्रकृति स्थिर नहीं है, वह निरंतर रूपांतरित होती रहती है।
(5) ल (ह्लो) = शांत, शांति, सामान्य, ज़िन्दगी, लगे रहना, लगातार, कर्ता, कार्य
भावार्थ:-ह्लो संतुलन और शांति का प्रतीक है।
सभी परिवर्तन अंततः शांति में विलीन होते हैं
जीवन की निरंतरता बनी रहती है
👉यही प्रकृति का अंतिम लक्ष्य है—संतुलन।
❤️शब्दार्थ (समेकित अर्थ)
पुदगल = प्रकृति
पुउ: (रक्षक भूमि) में यु: (गिरने वाली शक्ति/बूंद) → द: (जल/संगम) → गो: (परिवर्तन) → ह्लो (शांति)
रक्षक + बूंद + द्वीप/जल + परिवर्तन + शांति = प्रकृति
यही पुदगल है।
❤️भाषाविज्ञान दृष्टिकोण
भाषाविज्ञान के अनुसार “पुदगल”:
ध्वन्यात्मक केवल नहीं, अर्थ-आधारित शब्द है
प्रत्येक अक्षर क्रियात्मक (Process-oriented) है
यह शब्द स्थिर संज्ञा नहीं, बल्कि घटना-क्रम है
👉हो भाषा क्रिया प्रधान है, न कि केवल नाम प्रधान।
प्राकृतिक विज्ञान दृष्टिकोण
जल चक्र (यु: → द:)
भू-रचना (द: → द्वीप)
परिवर्तन (गो:)
संतुलन (ह्लो)
👉आधुनिक विज्ञान जिसे Ecosystem कहता है, वही हो’दर्शन में पुदगल है।
❤️जीव विज्ञान दृष्टिकोण
शुक्राणु (यु:)+अंडाणु (द:)
निषेचन = संगम
भ्रूण → विकास → जीवन → मृत्यु → तत्व
👉पूरा जीवन चक्र पुदगल में समाहित है।
❤️वनस्पति विज्ञान दृष्टिकोण
बीज का गिरना (यु:)
मिट्टी व जल से मिलन (द:)
अंकुरण व वृद्धि (गो:)
फल–बीज–शांति (ह्लो)
👉वृक्ष स्वयं पुदगल का जीवित रूप है।
❤️शरीर विज्ञान दृष्टिकोण
मानव शरीर भी पुदगल है
गर्भाशय (पुउ:), वीर्य/अंडाणु (यु: + द:), वृद्धि परिवर्तन (गो:), मृत्यु के बाद पंचतत्व में विलय (ह्लो)
👉शरीर = चलायमान प्रकृति
दर्शन में पुदगल = प्रकृति + जीवन + शरीर + परिवर्तन + शांति है।
❤️पुदगल और आधुनिक विज्ञान की मूल समानता
आधुनिक विज्ञान प्रकृति को कहता है—
Matter + Energy + Change + Equilibrium
हो’ दर्शन इसे कहता है
पुउ: + यु: + द: + गो: + ह्लो = पुदगल
👉दोनों का आधार प्रक्रिया (Process) है, न कि केवल वस्तु।
❤️पुदगल और भौतिक विज्ञान (Physics)
पदार्थ और ऊर्जा
आधुनिक भौतिकी कहती है
पदार्थ (Matter)
ऊर्जा (Energy)
रूपांतरण (Transformation)
हो’ दर्शन में:-पुउ: = आधार/क्षेत्र (Field)
यु: = ऊर्जा का अवतरण, गो: = रूपांतरण
❤️यह सीधे Energy–Matter Interaction से मेल खाता है। ऊर्जा का संरक्षण नियम
Physics:
Energy is neither created nor destroyed, only transformed.
हो’दर्शन:-गो: (परिवर्तन) → ह्लो (शांति/संतुलन)
❤️परिवर्तन के बाद ऊर्जा संतुलन में विलीन होती है।
पुदगल और रसायन विज्ञान (Chemistry)
जल (H₂O) = जीवन का आधार
रासायनिक संगम = नई संरचना
हो’दर्शन में:
द: = जल, संगम
यु: + द: = Reaction Initiation
👉यह Chemical Bonding और Reaction Dynamics के समान है।
❤️पुदगल और जीव विज्ञान (Biology)
(क) जीवन की उत्पत्ति
आधुनिक जीव विज्ञान:
शुक्राणु + अंडाणु = ज़ाइगोट
विकास → जीवन → मृत्यु
हो’ दर्शन:
यु: = शुक्राणु
द: = अंडाणु
गो: = विकास/रूपांतरण
👉यह Developmental Biology का संक्षिप्त सूत्र है।
(ख) विकासवाद (Evolution)
Darwin:
Continuous change leads to survival.
हो’ दर्शन:
गो: = निरंतर परिवर्तन
👉परिवर्तन ही जीवन का नियम है।
❤️पुदगल और पारिस्थितिकी (Ecology)
आधुनिक Ecology:
Ecosystem Balance
Biogeochemical Cycles
हो’दर्शन:पुदगल = संतुलित जीवन-तंत्र
ह्लो = स्थिरता और शांति
👉यह Sustainable System Thinking है।
❤️पुदगल और पृथ्वी विज्ञान (Earth Science)
वर्षा → नदी → समुद्र → वाष्प
महाद्वीप, द्वीप, भू-रचना
हो’दर्शन:- यु: = वर्षा, द: = जल/द्वीप
सात महाद्वीप का संकेत
👉यह Hydrological Cycle + Plate Formation का प्रतीकात्मक ज्ञान है।
❤️पुदगल और मानव शरीर विज्ञान (Human Physiology)
आधुनिक विज्ञान:-शरीर = जैव-रासायनिक मशीन
Homeostasis = संतुलन
हो’दर्शन:-शरीर = पुदगल, ह्लो = Homeostasis
👉दोनों में संतुलन जीवन की कुंजी है।
❤️पुदगल और सिस्टम साइंस (Systems Science)
Modern Systems Theory:
Input → Process → Output → Stability
हो’दर्शन:
यु: → द: → गो: → ह्लो
👉यह Natural System Model है।
❤️आधुनिक विज्ञान क्या स्वीकार कर रहा है?
आज विज्ञान मानता है कि प्रकृति जीवित प्रणाली है सब कुछ आपस में जुड़ा है, संतुलन बिगड़ने पर विनाश होता है
यही तो हो’ दर्शन का मूल संदेश है।
❤️आधुनिक विज्ञान पुदगल को समीकरणों में लिखता है,
हो’दर्शन पुदगल को जीवन में जीता है।
पुदगल = प्रकृति का वैज्ञानिक सूत्र
जो हजारों वर्ष पहले हो भाषा में कहा गया था,
आज वही सत्य आधुनिक विज्ञान दोहरा रहा है।
