Kol vansh ke shaasan vyavastha

Kol vansh ke shaasan vyavastha

Kol vansh ke shaasan vyavastha

Kol vansh ke shaasan vyavastha 🌍****लिटा गोसाञ****🌎

लिटा राजा कोल राजाओं के राजा थे ।
माना जाता है कि तीनों लोकों में उनका अधिपत्य रहा है|राजा लिटा नरसिंह रूप धारण करते थे।
विश्व के पहले ओत् गुरू लिटा गोसञ थे।

तांत्रिकों जैसे देंवां, सोका, दिउरि, एण इत्यादि आज भी लिटा राजा का नाम लेते हैं।
राजा लिटा को होड़ोसिंह,नरसिंह,नोरसिंहपाट,सिंगा बाबा,बोंगा सिंगराय, जोटो सिंह, जोटोगुरु, नोरसिङ गुरु, आदि नामों से से पूजे जाते हैं।
देंवां,सोका,एण मंत्रोच्चारण में आज भी ” अरे तले गुरु तले सिंह तले रजा तले दो” सिंह के रूप में लिटा राजा के शासनकाल का पता चलता है।

अकिञ: षाषन काड़ोय तेगे दिषुम हुदा तला मला षाषन चाल लगिड् ते ओकोन् षेषा किञ् बइयड् बुआ एना कोदो नेलेक: तबु।

अक्हाड़ा
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चेला
नेन चेला को गुरू त: रे इतु केन तयोम बिड़उ होबाना|
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पाट चेला
बिड़उ रे पुयुर जनको “पाट चेला”रेय: पोदबि को नमेया|
(निकु गे दसंय तेदो सेनो:आ)

बिड़उ रे का परोम दइको “डकुआ” रेय: हितड् दो नमेया।
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दसंय बिड़उ परोम् केह कोदो “देयोवां” को बइयो: अह।
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देंवां

नेन पोदबि को नमेया|
नेन पोदबि रे तइ केनय ते दणन तनि: |
हिड्नम – नम बोंगा पइटि
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सोका

नेन देंवां सीद के तयोम बुरू वोंगा(रिषि) को षहना|
तयोंग बुरू रे वोंगा बुरू को अउं उंर बेद को एमेया|
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अइ उंर बेद
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केवां(अइ उंर बेद रेन मरु/आयुर्वेद)
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दियुरि (हतु दियुरि )
2 रोकोम दियुरि-(1)षकुन(डिन्डा)दियुरि
षुकन पोरोब चि बुरु मगे रे बोंगा नि:इ्

(2)मगेदियुरि
क). मूड़ दियुरि
ख). जतरा दियुरि

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मुन्डा
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गोन्डइ(पीड़ दियुरी)
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मणाकि
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एण् ( दिषुम दियुरि / त्रिकालदर्शी )
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सोरदार(सरदार)
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सन्डि
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मरकि
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रिचि
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बिसिरि
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बियर बोयर
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राजा
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बिषुइ ( जति राजा )
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डुड्डा(सर्वोच्च न्यायाधीश)

डुड्डा रेय: पोदबि दो लको तिकिञ गे हताओ लेडा।
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डुड्डा लको तिकिञ ओत् गुरू तिकिञ: बोंग्ष
रेनकिञ गे किञ तइकेना ।

ये हैं कोल(हो)समाज में गुरू गद्दी की व्यवस्था|

नोट-कोल(हो) समाज में प्राचीन समय से ये शासन व्यवस्था चली आ रही थी ,जिन्हें बाद में समाप्त कर दिया गया।
वर्तमान टूटा फूटा “मुंडा-मानकी” शासन व्यवस्था इसी का dublicate है।

☝️🐆🐅हिर्ला वारङ दाड़े!
☝️🐆🐅 हिर्ला माङ बुरु-वोङ्गा बुरु को!
## जय कोल्हान

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