Bakana ka vaigyanik vyakhya
बाकणा(व्याकरण)अंधापन हटाने वाला ज्ञान-पुष्प
“बाकणा” को हिन्दी में व्याकरण कहा जाता है।
व्याकरण का काम है शब्दों को सही-सही बोलना, सही रूप में लिखना और भाषा को शुद्ध बनाना।
❤️बाकणा शब्द कहाँ से आया? (शब्दार्थ)
बाकणा = बा + कणा
बा = फूल, कणा = अंधा
संयुक्त से:-जिस प्रकार पौधे से अंधापन हटाकर फूल खिलता है, उसी प्रकार भाषा से गलती (अंधापन) हटाकर उसे सुंदर (फूल जैसा) बनाना ही बाकणा = व्याकरण है। अर्थात भाषा की गलतियों को हटाकर भाषा को फूल जैसा सुंदर बनाना।
❤️बाकणा के पाँच अक्षर (अक्षरार्थ)
बाकणा = बू + अ:+ को:+ एण + अ:
(1)बू(ब) = ढंकना, छिपाना, कब्जा, अर्जित ज्ञान, घुसना, ढेला, गोल
सरल अर्थ: ज्ञान को इकट्ठा करना और सुरक्षित रखना।
(2)अ: (अ-कार) = दुआं, धूल, रात, उड़ते बादल, दुख, याद
सरल अर्थ: अनुभव और स्मृति।
(3)को:(क) = भरोसा देने वाला, सहायक, साथ देने वाला
सरल अर्थ: गुरु, सहायक शक्ति।
(4)एण(म) = पुजारी, पुरोहित, सेवा करने वाला, जोड़ने वाला
सरल अर्थ: सिखाने वाला, सुधार करने वाला।
(5)अ:(अ-कार) = याद, अनुभव, दुख, धूल, वही दोहराव जो जीवन को समझने की क्षमता देता है।
❤️अक्षरार्थ से मिला संयुक्त अर्थ
अर्जित ज्ञान + याद शक्ति + सहायक (गुरु) + सुधार करने वाला पुजारी + बार-बार याद
व्याकरण (बाकणा) वह माध्यम है जिसके द्वारा अर्जित ज्ञान को याद रखा जाता है। गलतियों को हटाकर भाषा सुधारी जाती है। गुरु/सहायक सही बोलना–लिखना सिखाते हैं। बार-बार अभ्यास से भाषा शुद्ध बनती है
अर्थात भाषा को शुद्ध और वैज्ञानिक रूप में सीखने का साधन ही बाकणा है।
❤️शरीर और भाषा की तुलना (बहुत सरल उदाहरण)
जिस तरह:- आँख खराब हो → अंधा/अधी, मुँह खराब हो → गूंगा/गूंगी, कान खराब हो → बहरा/बहरी
उसी प्रकार व्याकरण (बाकणा) न हो → भाषा में गड़बड़ी। व्यक्ति सही बोल नहीं पाता, सही लिख नहीं पाता, अर्थ बिगड़ जाता है। जैसे शरीर अपने अंगों के बिना ठीक से काम नहीं करता, वैसे ही भाषा व्याकरण के बिना ठीक से काम नहीं करती। बाकणा दिमाग को सोचने, समझने और सही बोलने की दिशा देता है। यह भाषा का विज्ञान है।
बाकणा (व्याकरण) का काम है, भाषा की गलती दूर करना, भाषा को फूल जैसा सुंदर बनाना, सही बोलना और सही लिखना सिखाना, याद और ज्ञान को व्यवस्थित करना, गुरु की तरह भाषा का मार्गदर्शन करना
इसलिए बाकणा = भाषा का सहायक शिक्षक।
प्राकृतिक दृष्टिकोण:- प्रकृति में सब कुछ नियम से चलता है सूरज समय से निकलता है चाँद अपनी कला बदलता है पेड़ फूल से फल बनता है उसी तरह भाषा भी नियम से चलती है। बाकणा भाषा का प्राकृतिक नियम है।
साहित्यिक दृष्टिकोण:- कविता, कहानी, गीत और नाट
सबकी आत्मा भाषा है। और भाषा की सुंदरता बाकणा से आती है। बिना बाकणा साहित्य अधूरा है, बाकणा से साहित्य अमर हो जाता है।
