Vibhinn jaati dharmon mein mool devata ka naam
विभिन्न जाति, धर्मों में मूल देवता / सर्वोच्च शक्ति
विभिन्न जाति और धर्मों में सर्वोच्च शक्ति (मूल देवता) को अलग-अलग नामों से पुकारा जाता है।
प्रश्न यह है कि ये नाम कब आए, कैसे आए, किसने बनाए और क्यों बनाए? आज हम वैज्ञानिक एवं तकनीकी युग में जी रहे हैं। इसलिए प्राकृतिकता, वैज्ञानिकता और वास्तविकता को समझना बहुत जरूरी है। यदि हम इन बातों को नहीं समझेंगे, तो जाति और धर्म के नाम पर लोग स्वयं को उच्च मानकर दूसरों पर शोषण, अत्याचार और भेदभाव करते रहेंगे। इसलिए हमें मानवता, प्राकृतिकता और वैज्ञानिक सोच को सम्मान देना चाहिए।
🔶 विभिन्न धर्मों में मूल देवता के नाम:-
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1)🕉️ हिंदू धर्म = मूल देवता: ब्रह्म / विष्णु / महेश (शिव)
2)☪️ इस्लाम = मूल देवता: अल्लाह
3)✝️ ईसाई धर्म = मूल देवता: गॉड (God) / परमेश्वर
4)☸️ बौद्ध धर्म = कोई सृष्टिकर्ता ईश्वर नहीं
5)प्रमुख व्यक्तित्व: गौतम बुद्ध
6)🪯 सिख धर्म = मूल देवता: इक ओंकार / वाहेगुरु
7)✡️ यहूदी धर्म = मूल देवता: याहवे (Yahweh)
🌿 विभिन्न जनजातियों में सर्वोच्च देवता
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8)हो’ (कोल) = षिञ्वोङ्गा
9)संथाली = मारांग बुरु
10)मुंडारी = सिंगबोंगा
11)उरांव = धर्मेश
12)सौरिया पहाड़िया = बेडो गोसाई
13)गोंड = बूढ़ा देव / बड़ादेव
14)बिंझिया = विंध्यवासिनी देवी
15)बनजारा = बनजारा देवी
16)गोड़ाइत = पुरबिया
17)बिरहोर = वीर
18)बथुडी = पोलाठाकुर
19)खड़िया = गिरिंग
20)खरवार = मुचुकरनी
21)भूमिज = गोराईठाकुर
22)लोहरा = विश्वकर्मा
23)परहिया = धरती
24)भील = भगवान शिव (महादेव)
25)गोंड = बड़ादेव (Badadeo)
26)खासी = उ ब्लेई नोंगथाव
27)नागा = लिजाबा
👉मुख्य विचार :- सभी धर्म और जातियाँ अपने-अपने अनुसार सर्वोच्च शक्ति को अलग नाम देती हैं। लेकिन इन सभी नामों के पीछे मूल भाव एक ही है प्रकृति, ऊर्जा और जीवन का स्रोत।
🔬 वैज्ञानिक दृष्टिकोण :- आज विज्ञान के अनुसार ब्रह्मांड की उत्पत्ति Big Bang से हुई मानी जाती है, और जीवन का विकास Evolution के माध्यम से हुआ है। इस दृष्टि से देखा जाए तो प्रकृति और उसके नियम ही जीवन का आधार हैं। नाम अलग-अलग हैं, परंतु मूल शक्ति एक ही है। यदि हम केवल नामों में उलझे रहेंगे, तो समाज में भेदभाव बना रहेगा। यदि हम प्राकृतिकता, वैज्ञानिकता और मानवता को अपनाएँगे, तो समाज में समानता और सम्मान बढ़ेगा।
👉 “देवताओं के नाम अलग हो सकते हैं, लेकिन सृष्टि की मूल शक्ति एक ही है प्रकृति और ऊर्जा। इसलिए हमें भेदभाव नहीं, बल्कि मानवता को अपनाना चाहिए।”

