Culture

Jeevan Kee Shuruaat Hrday Se Kol Ho Gyaan Vigyan

Jeevan kee shuruaat hrday se kol ho gyaan vigyan

Jeevan kee shuruaat hrday se kol ho gyaan vigyan हमारे कोल–हो समाज के पूर्वजों ने जन्म को केवल एक परंपरा नहीं माना, बल्कि इसे प्रकृति, शरीर विज्ञान (Biology) और समाज विज्ञान से जोड़कर समझा। उनका हर नियम शरीर के अंदर होने वाली प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है। यह केवल संस्कार नहीं, बल्कि एक पूरा *वैज्ञानिक […]

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kunkal natural engineer hai

Kunkal natural engineer hai

Kunkal natural engineer hai   कुङ्कल (पॉटर वास्प) : भाषा, प्रकृति और आदिवासी ज्ञान का वैज्ञानिक आधार *कुङ्कल क्या है? (प्राकृतिक परिचय) हो भाषा में “कुङ्कल” उस जीव को कहा जाता है जिसे हिंदी/अंग्रेज़ी में Potter Wasp (मिट्टी का बर्तन बनाने वाली ततैया) कहा जाता है। यह एक ऐसा कीट है जो मिट्टी से हांडा

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vibhinn jaati dharmon mein mool devata ka naam

Vibhinn jaati dharmon mein mool devata ka naam

Vibhinn jaati dharmon mein mool devata ka naam   विभिन्न जाति, धर्मों में मूल देवता / सर्वोच्च शक्ति विभिन्न जाति और धर्मों में सर्वोच्च शक्ति (मूल देवता) को अलग-अलग नामों से पुकारा जाता है। प्रश्न यह है कि ये नाम कब आए, कैसे आए, किसने बनाए और क्यों बनाए? आज हम वैज्ञानिक एवं तकनीकी युग

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Borobunji Bonga ka mahatva

Borobunji Bonga ka mahatva

 Borobunji Bonga ka mahatva Borobunji Bonga ka mahatva-बताया जाता है कि यह प्रचलित बोड़ोबुञ्जी पूजा लोग सदियों से मनाते आ रहें है; पूर्वजों या बुजुर्गों वर्गों का कहना है कि वर्ष में एक बार अवश्य करना है। शांति एवं रोगो बिमारियों से रक्षक का द्योतक माना जाता है। मागे पर्व की समाप्ति के दूसरा महीना

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kolom bonga ka mahatva

Kolom Bonga ka mahatva

 Kolom Bonga ka mahatva Ho Samaj Kolom Bonga ka mahatva-यों तो हो किसान भाई द्वारा फसल कटाई के बाद एक जगह मन्डी अथवा गोदाम बनाया जाता है जिसे कोलोम कहा जाता है। कोलोम को साफ सुथरा परिष्कृत किया जाता है। इकट्टा हुआ फसल धान एवं बीज को सुरक्षित रखने का प्रयास किया जाता है। इष्ट

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Marang bonga ka mahatva

Marang bonga ka mahatva

Maran bonga ka mahatva मरं वोङ्गा Kol Samaj Marang bonga ka mahatva – हो समाज में मरं वोङ्गा की भी विशेष रूप से रोचक कथा है। मुख्यतः मानव सृष्टि के प्रथम चरण में लुकु दम्पति दोनों एक दिन एक चबुतरे पर बैठे थे। सारे जीव जन्तुओं ने आ कर दोनो को फूलमाला से सेवा सुश्रुषा

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kol ho sanskriti darpan

Kol Ho Sanskriti Darpan

Kol Ho Sanskriti Darpan-कोल हो संस्कृति दर्पण “हो” कोल जन जाति की संस्कृति के अध्ययनार्थ दर्पण। प्रगतिशील वैज्ञानिक युग में खास कर राष्ट्रीय संगठन एवं भारतीय स्वतंत्रता के अस्तित्व रक्षार्थ विचार धारा की परख से साफ प्रतीत होता है कि भारत एक संयुक्त सामाजिक राष्ट्र है। इस की नवीनता एवं पौष्टिकता तभी पनप सकेगी; जब

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Ho Munda Samaj mein Bid Diri ka itihas

Ho Munda Samaj mein Bid Diri ka itihas

Ho Munda Samaj mein Bid Diri ka itihas आदिवासी समाज का इतिहास केवल लिखित ग्रंथों में नहीं, बल्कि उनके पत्थरों, परंपराओं और सांस्कृतिक चिह्नों में जीवित रहता आया है। ऐसा ही एक अमिट प्रतीक है — ‘बिड दिरि’, जो कोल-हो समाज की सांस्कृतिक पहचान, ऐतिहासिक स्मृति और सामाजिक संरचना का अहम हिस्सा है। ‘बिड दिरि’

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Sasan Diri Ho Munda samaj ka pehchan hai

Sasan Diri Ho Munda samaj ka pehchan hai

Sasan Diri Ho Munda samaj ka pehchan hai  ससन दिरि हमारे हो समाज के अदभुत पुराने ऐतिहासिक धरोहर :- ससन दिरि कोल हो समुदाय की एक अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर है। यह केवल एक पत्थर नहीं, बल्कि कोल लोगों की पहचान, आत्मसम्मान, परंपरा और सामूहिक स्मृति का प्रतीक है। यह उन मूलवासी परंपराओं की निशानी है,

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Kol Rules Ancient Culture

Kol Rules Ancient Culture

Kol Rules Ancient Culture कोल रूल आदि संस्कृति  अनुवादक-श्री लको बोदरा संस्थापक एवं संचालक आदि संस्कृति एवं विज्ञान संस्थान, पता-पासेया, अयोध्या पीढ़। एटेः तुर्तुङ पिटिका आखड़ा, झींकपानी। उपक्रमणिका :- आज तिथि 8-11-1961 ई. को दुपुब हुदा (आदि समाज ) की जागृति पर छानबीन करते हुए एटेः तुर्तुङ पिटिका आखाड़ा (आदि संस्कृति एवं विज्ञान केन्द्र) की

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