Jeevan Kee Shuruaat Hrday Se Kol Ho Gyaan Vigyan

Jeevan kee shuruaat hrday se kol ho gyaan vigyan

Jeevan kee shuruaat hrday se kol ho gyaan vigyan हमारे कोल–हो समाज के पूर्वजों ने जन्म को केवल एक परंपरा नहीं माना, बल्कि इसे प्रकृति, शरीर विज्ञान (Biology) और समाज विज्ञान से जोड़कर समझा। उनका हर नियम शरीर के अंदर होने वाली प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है। यह केवल संस्कार नहीं, बल्कि एक पूरा *वैज्ञानिक […]

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kunkal natural engineer hai

Kunkal natural engineer hai

Kunkal natural engineer hai   कुङ्कल (पॉटर वास्प) : भाषा, प्रकृति और आदिवासी ज्ञान का वैज्ञानिक आधार *कुङ्कल क्या है? (प्राकृतिक परिचय) हो भाषा में “कुङ्कल” उस जीव को कहा जाता है जिसे हिंदी/अंग्रेज़ी में Potter Wasp (मिट्टी का बर्तन बनाने वाली ततैया) कहा जाता है। यह एक ऐसा कीट है जो मिट्टी से हांडा

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vibhinn jaati dharmon mein mool devata ka naam

Vibhinn jaati dharmon mein mool devata ka naam

Vibhinn jaati dharmon mein mool devata ka naam   विभिन्न जाति, धर्मों में मूल देवता / सर्वोच्च शक्ति विभिन्न जाति और धर्मों में सर्वोच्च शक्ति (मूल देवता) को अलग-अलग नामों से पुकारा जाता है। प्रश्न यह है कि ये नाम कब आए, कैसे आए, किसने बनाए और क्यों बनाए? आज हम वैज्ञानिक एवं तकनीकी युग

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rosha element ka vaigyanik vyakhya

Rosha Element ka Vaigyanik vyakhya

Rosha Element ka Vaigyanik vyakhya “रोषा” (तत्व) : हो भाषा में प्रकृति, विज्ञान और भाषा का समन्वय हो भाषा में “तत्व” के लिए प्रयुक्त शब्द रोषा केवल एक साधारण शब्द नहीं है, बल्कि यह हमारे पूर्वजों के गहन ज्ञान, प्रकृति के सूक्ष्म अवलोकन और वैज्ञानिक सोच का प्रतीक है। यह शब्द दो भागों—रो + षा—से

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Ho samaj me Nage Era ka vaigyanik vyakhya

Ho samaj me Nage Era ka vaigyanik vyakhya

Ho samaj me Nage Era ka vaigyanik vyakhya 💧नगे एरा (जल देवी) हो समाज के प्रकृति-दर्शन, भाषा-विज्ञान और सृष्टि-तत्त्व का वैज्ञानिक व्याख्या 💧नगे एरा जल के रूप में विद्यमान देवी हो समाज के मत अनुसार नगे एरा कोई कल्पित देवी नहीं, किंतु स्वयं का चेतन स्वरूप है। नगे एरा प्रकृति में जल के रूप में,

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Ho samaj Deshauli ka vaigyanik vyakhya

Ho samaj Deshauli ka vaigyanik vyakhya

Ho samaj Deshauli ka vaigyanik vyakhya आज हम वैज्ञानिक एवं तकनीकी युग में जी रहे हैं। इस युग में वास्तविकता से मुँह मोड़कर नहीं जिया जा सकता। आज के समय में वही समाज सभ्य माना जाता है, जो प्राकृतिक नियमों और वैज्ञानिक सिद्धांतों के अनुरूप जीवन व्यतीत करता है। जब सवाल उठते हैं, तो उनके

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Bindiram ka goon aur vaigyanik vyakhya

Bindiram ka goon aur vaigyanik vyakhya

Bindiram ka goon aur vaigyanik vyakhya 🖊️हो भाषा में बिंदीरम (मकड़ी) प्रकृति-प्रदत्त पारंपरिक ज्ञान-विज्ञान का जीवंत प्रमाण ❤️हो भाषा में मकड़ी को “बिंदीरम” कहा जाता है। बिंदीरम केवल एक कीट या जीव नहीं है, बल्कि यह हो समाज की भाषिक चेतना, प्राकृतिक बोध, वैज्ञानिक दृष्टि, सामाजिक मर्यादा और सांस्कृतिक स्मृति का प्रतिनिधि है। हो समाज

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Bakana ka vaigyanik vyakhya

Bakana ka vaigyanik vyakhya

Bakana ka vaigyanik vyakhya बाकणा(व्याकरण)अंधापन हटाने वाला ज्ञान-पुष्प “बाकणा” को हिन्दी में व्याकरण कहा जाता है। व्याकरण का काम है शब्दों को सही-सही बोलना, सही रूप में लिखना और भाषा को शुद्ध बनाना। ❤️बाकणा शब्द कहाँ से आया? (शब्दार्थ) बाकणा = बा + कणा बा = फूल, कणा = अंधा संयुक्त से:-जिस प्रकार पौधे से

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Dakuwa ka kam aur shabd vyakhya

Dakuwa ka kam aur shabd vyakhya

Dakuwa ka kam aur shabd vyakhya “डकुवा :- जहाँ से डाक, डाकिया और डाकघर की अवधारणा विकसित हुई कोल हो मुंडा समाज की पारंपरिक शासन व्यवस्था अत्यंत सुव्यवस्थित, वैज्ञानिक और सामुदायिक रही है। इस व्यवस्था में प्रत्येक पद की स्पष्ट भूमिका होती है। डकुवा ऐसा ही एक महत्वपूर्ण पद है, जो गांव और समाज को

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Buru shabd ka vaigyanik vyakhya

Buru shabd ka vaigyanik vyakhya

Buru shabd ka vaigyanik vyakhya बुरु (पहाड़) : शब्द, अर्थ और प्रकृति विज्ञान बुरु शब्द का हिन्दी अर्थ पहाड़ होता है। यह शब्द हो भाषा में प्रकृति से गहरे संबंध को दर्शाता है। बुरु केवल एक भौगोलिक संरचना नहीं है, बल्कि यह समय, जल, भूमि और संरक्षण की संयुक्त प्रक्रिया का परिणाम है। ❤️शब्द रचना

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