singhbhum ki dharti par ladka kol ho samuday ka swatantrata sangharsh

Singhbhum ki dharti par ladka Kol Ho samuday ka swatantrata sangharsh

Singhbhum ki dharti par ladka Kol Ho samuday ka swatantrata sangharsh

सिंहभूमि के सघन वनप्रदेश में स्वाधीन, निर्भीक और घोर स्वाभिमानी लाड़का कोल (हो) समुदाय के गाँव अपनी स्वतंत्र पहचान के साथ स्थापित थे। प्रत्येक गाँव में ग्राम स्वराज्य की परंपरा जीवित थी। गाँवों के अलाव केवल गर्मी और प्रकाश के प्रतीक नहीं थे, बल्कि सामुदायिक एकता, आत्मनिर्भरता और स्वतंत्र जीवन-पद्धति के भी प्रतीक थे। यहाँ की पारंपरिक मानकी–मुंडा शासन व्यवस्था अत्यंत सुदृढ़, संगठित और प्रभावी थी।

मानकी–मुंडा शासन व्यवस्था और ग्राम स्वराज्य

मानकी–मुंडा व्यवस्था के अंतर्गत ग्राम प्रशासन, न्याय, सामाजिक व्यवस्था और सामूहिक निर्णय स्थानीय स्तर पर ही संपन्न होते थे। यही व्यवस्था लाड़का कोल (हो) समाज की स्वायत्तता और सामाजिक संगठन की आधारशिला थी।

स्वतंत्रता और स्वाभिमान की रक्षा

इतिहास साक्षी है कि स्वतंत्र और समृद्ध समाज सदैव विस्तारवादी शक्तियों की दृष्टि में खटकते रहे हैं। सिंहभूमि का स्वाधीन लाड़का कोल (हो) समुदाय भी इससे अछूता नहीं रहा। पड़ोसी राजाओं और रजवाड़ों ने उन्हें अपने अधीन करने तथा उनकी स्वतंत्रता समाप्त करने के अनेक प्रयास किए, परंतु लाड़का कोल (हो) समुदाय ने अपनी स्वतंत्रता और स्वाभिमान से कभी समझौता नहीं किया।

पोड़ाहाट राज्य और अंग्रेजी सत्ता

लाड़का कोल (हो) योद्धाओं के प्रबल प्रतिरोध के कारण पोड़ाहाट राज्य के लिए उन्हें अपने अधीन करना संभव नहीं हो सका। अंततः पोड़ाहाट राज्य ने अंग्रेजी सत्ता से सहायता लेने का निर्णय लिया।

ईस्ट इंडिया कम्पनी से सहायता की मांग

– 1767 ई. – पहली बार सैन्य सहायता की मांग
– 1809 ई. – दूसरी बार सहायता का निवेदन
– 1818 ई. – तीसरी बार सहायता की प्रार्थना

इन प्रयासों के बदले पोड़ाहाट राज्य ईस्ट इंडिया कम्पनी की अधीनता स्वीकार करने के लिए तैयार हो गया।

1820 की कबूलियत (Agreement)

1819 ई. में ईस्ट इंडिया कम्पनी ने अपने अधिकारी कैप्टन रुद्देल को पोड़ाहाट के राजा घनश्याम सिंह से वार्ता के लिए भेजा। परिणामस्वरूप 18 फ़रवरी 1820 को एक कबूलियत (Agreement) पर हस्ताक्षर हुए। इसके अंतर्गत राजा घनश्याम सिंह ने कम्पनी की अधीनता स्वीकार कर ली।

मेजर रफसेज का सैन्य अभियान

मार्च 1820 में कम्पनी ने मेजर रफसेज (Major Roughsedge) को लाड़का हो लोगों के विरुद्ध सैन्य अभियान चलाने का आदेश दिया। यहीं से सिंहभूमि में अंग्रेजी सत्ता और लाड़का कोल (हो) समुदाय के बीच संघर्ष का नया अध्याय प्रारंभ हुआ।

भारतीय आदिवासी प्रतिरोध में ऐतिहासिक महत्व

लाड़का कोल (हो) समुदाय का यह संघर्ष केवल क्षेत्रीय सत्ता के विरुद्ध विद्रोह नहीं था, बल्कि स्वतंत्रता, स्वाभिमान, आत्मशासन और सांस्कृतिक अस्मिता की रक्षा का महान आंदोलन था। यह संघर्ष भारतीय आदिवासी इतिहास में स्वाधीनता चेतना के महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में स्मरण किया जाता है।

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