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Ho bhasha ka anka

Ho bhasha ka anka हो भाषा का अंका (अंक) — जो अपने आप में वैज्ञानिक है हो भाषा का अंका, लेका, मोयोड् और तुड़: 🌍अंका (अंक) का अर्थ अंका का निर्माण “अं + का” से हुआ है। “अं” का अर्थ है सुबह की पहली किरण, जन्म, सूर्य का उगना, अंकुर का प्रकट होना। “का” का […]

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Pita aur uska bachcha Sanskriti pariwartan ka sach

Pita aur uska bachcha Sanskriti pariwartan ka sach पिता और उसका बच्चा: संस्कृति परिवर्तन का सच बहुत समय पहले की बात है। एक गाँव में एक पिता अपने छोटे बेटे के साथ रहता था। पिता धार्मिक और परंपरा-प्रिय व्यक्ति था। जब भी कोई पर्व या त्योहार आता, वह अपने घर के अदिञ (रसोईघर) में बैठकर

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वारङ चिति लिपि में 32 अक्षर ही क्यों?

वारङ चिति लिपि 32 अक्षर क्यों हैं? जानिए इसका खास वैज्ञानिक कारण

वारङ चिति लिपि में 32 अक्षर ही क्यों? परिचय वारङ चिति लिपि 32 अक्षर का विषय केवल भाषा का विषय नहीं है, बल्कि यह विज्ञान, संस्कृति और मानव जीवन से गहराई से जुड़ा हुआ है। दुनिया की अधिकांश लिपियाँ समय के साथ विकसित हुई हैं, जिनमें अक्षरों की संख्या किसी निश्चित वैज्ञानिक आधार पर तय

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Chara didi prakriti ke saphaikarmee

Chara didi prakriti ke saphaikarmee चड़ा दिदि प्रकृति के सफाईकर्मी कुछ साल पहले गाँवों के आसमान में गिद्धों (दिदि) का बड़ा झुंड उड़ता हुआ दिखाई देता था। गिद्ध साधारण पक्षी नहीं थे, बल्कि उन्हें लोग प्रकृति का पुजारी और गाँव का सफाईकर्मी मानते थे। गाँव में जब भी कोई पशु—गाय, भैंस, बकरी, कुत्ता या बिल्ली

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In the human heart, Warang Chiti Ong

In the human heart, Warang Chiti Ong “In the human heart, Warang Chiti Ong “ओ’ङ” Ong केवल एक अक्षर नहीं, बल्कि ब्रह्माण्ड की ध्वनि है।वारङ चिति हो समाज की मौलिक और वैज्ञानिक लिपि है। इसमें ३२ अक्षर हैं, जिनमें पहला और सबसे मूल अक्षर है – “ओ’ङ”  यही “ओङ” सम्पूर्ण सृष्टि का बीज है, क्योंकि

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Warang Chiti script is a scientific and spiritual script

Warang Chiti script is a scientific and spiritual script Warang Chiti script is a scientific and spiritual script वारङ चिति लिपि : ध्वनि और प्रकृति का वैज्ञानिक, दार्शनिक एवं आध्यात्मिक स्वरूप मानव सभ्यता में भाषा और लिपि का जन्म सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिना जाता है। परंतु भाषा का बीज केवल समाज की देन नहीं

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Kol created in nature from the script of society

Kol created in nature from the script of society Kol created in nature from the script of society षृषपहाड़ (दुदुलुम बुरु) : वारङ चिति लिपि का पुनर्जन्म स्थल हो समाज की अमूल्य धरोहर वारङ चिति लिपि का पुनः खोज और प्रमाण इसी षृषपहाड़ (उड़िया में पराबड़ी पर्वत, हो भाषा में दुदुलुम बुरु) से जुड़ा हुआ

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World’s first script warang chiti

World’s first script warang chiti World’s first script warang chiti कोम्चोङ दिरि:- मानव सभ्यता और वारङ चिति लिपि का प्रमाण 🫀 भारत की धरती अनादिकाल से ही ज्ञान, संस्कृति और सभ्यता की जन्मभूमि रही है। झारखंड राज्य में सिंहभूम जिला के चितिरलिबि गांव (पाटायां रोड, किताहतु) स्थित कोम्चोङ दिरि नामक बिडदिरि (पत्थरगढ़ी) का विशेष महत्व

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Kol Muluk Andiya Guru

Kol Muluk Andiya Guru “कोल मुलुक अंडिया गुरु” यह कोई साधारण वाक्य नहीं, बल्कि कोल हो समाज की ऐतिहासिक पहचान, शक्ति और ज्ञान का प्रतीक है। यह वाक्य प्राचीन काल से ही प्रचलित है और केवल कोल समाज ही नहीं, बल्कि अन्य समाजों के लोग भी इसे जानते और बोलते आए हैं। शब्दों का अर्थ

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Customs of Singhbhum

Customs of Singhbhum 📜 कोल्हान गवर्नमेंट इस्टेट ऐतिहासिक एवं संवैधानिक आधार 1. एसियाटिक सोसायटी ऑफ बंगाल – 1840 ई. “जर्नल ऑफ द एशियाटिक सोसायटी ऑफ बंगाल” (1840) में हो दिषुम (Customs of Singhbhum) का उल्लेख मिलता है। इसमें बताया गया कि हो समाज की अपनी प्राचीन शासन व्यवस्था (मानकी-मुंडा प्रणाली) विद्यमान थी और ब्रिटिश सरकार

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