Dohm ruha hon bah

दोहम रुआ होन बाह
यह दोहम रूहा होन बाह पूजा, बाह का ही दूसरा रूप है। जब लुकु लड़ाई में चले गये, इधर लुकु कुड़ी प्रसव में आ गई, भाग्य से बिरवेन्डकर नामक पुत्र का जन्म हुआ। लुकु अब युद्ध में विजयी होकर लौटे, जब देखता है इधर अब एक संख्या बढ़ गया। उसने अपने पत्नी को बधाई दिया और खुशियाली में उसे फूल माला से श्रृंगार करना चाहा तो फूल दाना में प्रवृति हो चुका है। फिर भी उन्होनें नये फलों से सजाया जिसका गीत प्रसिद्ध है-
बाड़ा गुटु कोदो रेको सेनोंतना
देला रे गोलान्चिञ सुनुम लेमा
डाली गलं कोदो रेको विराड तना देला रे मोचोकोन्दीञ नकी लेमा।
बाड़ा गुतु नोरा रेदो कुला जना देला रे गोलन्चिञसुनुम लेमा
डाली गलं डारेन दो बिरंजी जना देलारेमोचोकोन्दीञ नकी लेमा
मधुकम दिशुम रे दादा नलो रेम गोड.ञा दादा
सराजोम मुलुक रे दादा नलारेम चालिञा दादा
मधुकम दिशुम दो दादा
निदा रूवुं रूकुंआ दादा
सरजोम मुलुक दो दादा
सिंगी लया लया दादा
लुकु कोड़ा युद्ध से आमावश्य को हपल महीना कामयाब होकर लौटा और त्योहार मनाया। इसीलिए हपल (मिरसंदी) आमावश्य को दो हम रूहा होन बाह की पूजा पाठ होता है। मनाया जाता है असली संस्कृति का प्रतीक है या ख्याति है।

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