Jomnama ka mahatv

Ho samaj me Jomnama ka mahatv-दूसरे दिन पौ फटते ही अपने पिता का पुर्नजन्म दिया। सुबह होते ही पिता जीवित हो कर दुनिया वाले को दिखाया। उसी खुशी में जोमनमा त्योहार मनाया जाता है। क्योंकि नीचे के सांस्कृतिक वाक्य से पता लगता है। एना नमा माटा नमा सुरा जोम तन नु तन रे दिऊ गई दिऊ हाड़ा केड़ा बबाजी कोदेजी बुगिया कन नपैआ कनो चा “यह पर्व नया चाँद प्रतिपदा को जोनोम महिना मनाया जाता है। इस तरह से जब लिटा राजा हो गया तो यह सहित किया गया और समय सारिणी पर रूपान्तर किया गया। लिटा अमर पद पाया और जो भी कार्य उन के द्वारा हुआ ऐतिहासिक तौर पर मनाया जाने लगा है। लिटा गोसाई के नाम पर पूजा आराधना की जाती है। राजा वंशज के परम्परागत आदर्श पर हो लोग शव दफना दिया जाने पर स्मारक पत्थर चिन्ह पत्थर दिया जाता रहा है। कोसो सोसो एवं त्रिलचटकम गढ़ कर शपथ लिया इसलिए सोसो पत्ती प्रयोग में लायी जाती है। खैर जो भी हो यह सांस्कृतिक आदि इतिहास और साहित्य की झलक है। समय के अभाव में संक्षेप में लिख रहा हूँ। आशा है इससे आदिवासियों और दलित कहलाये गये वर्गों का उत्थान व प्रेरणा प्राप्त हो सकेगा। जाहिर रहे जोनोम अंआई (चतुर्दशी) को गुरू कोल लाको बोदरा का जन्म दिवस मनाया जाता है।

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