Ong hi brahmand ki vastavik dhvani hai om nahin
🌌 ONG ही ब्रह्मांड की वास्तविक ध्वनि है — OM नहीं
ब्रह्मांड एक जीवित सत्ता है — यह स्थिर नहीं, बल्कि निरंतर कंपनशील (Vibrating) है।
इस कंपन से जो मूल ध्वनि उत्पन्न होती है, वह हर दिशा में गूंजती रहती है। वह कोई धार्मिक मंत्र नहीं, बल्कि प्रकृति की आत्मा की आवाज़ है।
वास्तव में यह ध्वनि ONG (ओ’ङ) है, OM (ॐ) नहीं।
❤️ब्रह्मांडीय ध्वनि क्या है?
जब वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष से प्राप्त रेडियो तरंगों का विश्लेषण किया, तो पाया गया कि शून्य में भी एक निरंतर गूँज (Humming Sound) उपस्थित है।
NASA ने इसे रिकॉर्ड किया और उसे “Cosmic Background Vibration” कहा।
यदि आप इस ध्वनि को ध्यान से सुनें, तो यह किसी “OM” जैसी स्पष्ट लय नहीं है,
बल्कि “ओऽऽऽङ” जैसी प्राकृतिक प्रतिध्वनि (Echoic sound) है। इससे सिद्ध होता है कि जो ध्वनि सृष्टि के आरंभ से आज तक गूंज रही है, वह ONG है — OM नहीं।
“ONG” का स्वभाव — प्रतिध्वनि की ऊर्जा
ONG (ओ’ङ) दो ध्वनि तत्वों से मिलकर बना है —
ओ (O) — सृजन की प्रथम ऊर्जा।
ङ (Ng) — प्रतिध्वनि या लौटती हुई तरंग।
जब कोई वस्तु ध्वनि उत्पन्न करती है, तो वह किसी सतह से टकराकर ECHO बनाती है।
वह प्रतिध्वनि ही ONG है —
वह जो उत्पन्न होकर ब्रह्मांड में घूमती है और पुनः अपने स्रोत में लौटती है। यह वही ध्वनि है जो धरती की गुफाओं, पर्वतों और गहरे जल में भी सुनाई देती है।
इसीलिए कहा गया — “ONG वह स्वर है जिसमें पृथ्वी और आकाश का संवाद होता है।”
❤️OM क्यों नहीं है वास्तविक ब्रह्मांडीय ध्वनि?
OM (ॐ) वेदांत और योग की परंपरा में एक मानव निर्मित प्रतीकात्मक ध्वनि है।
यह “अ+उ+म्” से बनी एक त्रिगुणात्मक संरचना है —
जो सृष्टि, पालन और संहार के विचार को ध्वन्यात्मक रूप में व्यक्त करती है। परंतु यह विचारात्मक (Conceptual) है, न कि प्राकृतिक।
OM का उच्चारण मानव ने ध्यान के लिए बनाया,
जबकि ONG वह ध्वनि है जो मानव से पहले भी विद्यमान थी — पृथ्वी के जन्म से लेकर आज तक।
इसलिए OM एक संस्कारजन्य शब्द है, जबकि ONG प्रकृति की मूल भाषा है।
❤️वैज्ञानिक प्रमाण : ध्वनि की प्रतिध्वनि
जब आप किसी गहरी गुफा, पहाड़ या विशाल गुहा में “ओ” या “आ” की आवाज़ निकालते हैं,
तो आपको जो प्रतिध्वनि लौटकर सुनाई देती है, वह “ङ” में समाप्त होती है — जैसे “ओऽऽऽङ” या “आऽऽङ”।
यह प्राकृतिक उदाहरण है कि ब्रह्मांड में गूँजने वाली मूल ध्वनि ONG ही है।
NASA और ESA (European Space Agency) की ध्वनि रिकॉर्डिंग्स में यह तरंग 7.83 Hz की Schumann Resonance में पाई गई है —
जो पृथ्वी और आयनमंडल के बीच की प्राकृतिक आवृत्ति है। यह ध्वनि किसी “OM” लय से नहीं, बल्कि “Ong-like humming” से मेल खाती है।
❤️आध्यात्मिक और आदिवासी दृष्टिकोण
HO समाज और अन्य आदिवासी परंपराओं में
ईश्वर या सृष्टिकर्ता की आराधना “ONG” ध्वनि से आरंभ होती है। उनके अनुसार यह ध्वनि ही जीव और प्रकृति के बीच का संबंध सूत्र है।
जब साधक “ONG” का ध्यान करता है,
तो उसकी आंतरिक लय ब्रह्मांड की लय से जुड़ जाती है।
यह जुड़ाव Resonance कहलाता है —
जिससे मन में शांति, संतुलन और आत्मिक प्रकाश अनुभव होता है।
वहीं “OM” का ध्यान मन की चेतना को स्थिर करता है,
परंतु “ONG” का ध्यान पूरे अस्तित्व को ब्रह्मांडीय चेतना से एक कर देता है।
❤️दार्शनिक अर्थ
ONG = आद्य ध्वनि (Primordial Sound)
OM = उसके प्रतीक का संस्कृत रूप (Symbolic Sound) ONG वह सत्य है जो प्रकृति से अनुभव किया जा सकता है, OM वह रूप है जो धार्मिक साधना में व्यक्त किया जाता है। ONG में कोई भाषा नहीं, कोई धर्म नहीं — वह शुद्ध कंपन की भाषा (Language of Vibration) है। यह ध्वनि ब्रह्मांड की हृदय गति है — जो हर जीव के भीतर भी सूक्ष्म रूप में धड़कती है।
सृष्टि की आरंभिक ध्वनि OM नहीं, ONG थी और आज भी है। यह पृथ्वी की गुफाओं, समुद्र की गहराइयों, और अंतरिक्ष की तरंगों में गूँजती है।
OM उस अनादि ध्वनि का मानव-भाषा में अर्थात्मक रूप है, परंतु ONG उसका वास्तविक ध्वनिक अस्तित्व (Sound Reality) है। “जो ब्रह्मांड सुन रहा है, वह ONG है — और जो मनुष्य बोल रहा है, वह OM है।”
“ओऽऽऽङ” का उच्चारण करें — क्योंकि वही प्रकृति की, सृष्टि की और आत्मा की वास्तविक आवाज़ है।
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