World’s first script warang chiti
World’s first script warang chiti कोम्चोङ दिरि:- मानव सभ्यता और वारङ चिति लिपि का प्रमाण 🫀
भारत की धरती अनादिकाल से ही ज्ञान, संस्कृति और सभ्यता की जन्मभूमि रही है। झारखंड राज्य में सिंहभूम जिला के चितिरलिबि गांव (पाटायां रोड, किताहतु) स्थित कोम्चोङ दिरि नामक बिडदिरि (पत्थरगढ़ी) का विशेष महत्व है। यह स्थल न केवल हो समाज के लिए, बल्कि सम्पूर्ण मानवता के इतिहास को समझने में भी अत्यंत मूल्यवान है।
कोम्चोङ दिरि का महत्व
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इस बिडदिरि का नाम कोम्चोङ हड़म के नाम पर पड़ा। यहां पर पूर्वजों ने वारङ चिति लिपि का प्रयोग करके हेस: और पिंगुवा किलि (गोत्र) अंकित किए थे। यह तथ्य इस बात को प्रमाणित करता है कि हमारे पूर्वज न केवल संगठित समाज में रहते थे, बल्कि वे भाषा, लिपि और लेखन प्रणाली से भी परिचित थे।
कार्बन डेटिंग का परिणाम
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आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) द्वारा की गई कार्बन डेटिंग के अनुसार, यह पत्थर लगभग 1.32 करोड़ वर्ष पुराना है। यह खोज अपने आप में अद्भुत है क्योंकि इससे यह सिद्ध होता है कि मानव सभ्यता की जड़ें भारत भूमि पर अत्यंत प्राचीन हैं।
वारङ चिति लिपि: पहली मानव लिपि
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वारङ चिति लिपि को दुनिया की पहली वैज्ञानिक, प्राकृतिक और आध्यात्मिक लिपि माना जाता है।
इस लिपि में ध्वनि और आदिध्वनि दोनों के चिह्न मिलते हैं। यह लिपि केवल लेखन का साधन नहीं, बल्कि प्रकृति और मानव शरीर से सीधा जुड़ा हुआ ज्ञान है।
भारत: विश्वगुरु का प्रमाण
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जब हम देखते हैं कि करोड़ों वर्ष पूर्व भारत भूमि पर न केवल मानव का उद्भव हुआ, बल्कि लिपि, साहित्य, संस्कृति और ज्ञान-विज्ञान का विकास भी यहीं से शुरू हुआ, तो यह तथ्य बिल्कुल स्पष्ट हो जाता है कि भारत वास्तव में विश्वगुरु रहा है।
कोम्चोङ दिरि जैसे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों को संरक्षित करना हमारी जिम्मेदारी है। यह सिर्फ हो समाज का गौरव नहीं, बल्कि सम्पूर्ण मानव सभ्यता की धरोहर है। आने वाली पीढ़ियों को यह जानना जरूरी है कि उनके पूर्वजों ने कैसे लाखों-करोड़ों वर्ष पूर्व ज्ञान, लिपि और संस्कृति की नींव डाली थी।
इस प्रकार कोम्चोङ दिरि सिर्फ एक पत्थर नहीं, बल्कि यह मानवता की सबसे प्राचीन गाथा का जीवंत साक्ष्य है।
