Ho Bhasha ka Vishesh Jankaree

Ho Bhasha ka Vishesh Jankaree

Ho Bhasha ka Vishesh Jankaree

“हो भाषा” प्रगैतिहासिक काल की प्रकृति प्रदत भाषा है।

  • “हो भाषा” ऑस्ट्रोएशियाटिक अग्नेय भाषा परिवार के भाषा है।
  •  “हो भाषा” झारखंड,उड़ीसा और पश्चिम बंगाल में बहुतायत में बोली जाती है।
  •  शिक्षा विभाग,बिहार सरकार के पत्रांक 2/प-101-69 शि. 3415,दिनांक 07 जुलाई 1973 द्वारा निर्गत परिपत्र की कंडिका 3 द्वारा “हो भाषा” को द्वितीय भारतीय भाषा के रूप में स्वीकार किया गया है।
  • 30 अगस्त 2011 को झारखंड सरकार ने “हो भाषा” को द्वितीय राजभाषा के रूप में मान्यता दी गयी है।
  • झारखंड अधिविध परिषद राँची के अंतर्गत “हो भाषा” की पढ़ाई वर्ग एक से इंटरमिडियट तक होती है
  •  राँची विश्वविश्वविद्यालय,राँची के अंतर्गत जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा के रूप में “हो भाषा” की पढ़ाई स्नातक(प्रतिष्ठा) एवं स्नातकोतर स्तर पर वर्ष 1980 से ही चल रही है।
  • कोल्हान विश्वविद्यालय चाईबासा में “हो भाषा” की पढ़ाई स्नातक(प्रतिष्ठा),स्नातकोतर एवं शोध कार्य चल रहा है।
  • झारखंड लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित होने वाली परीक्षाओं में “हो भाषा” भी एक पात्र के रूप में शामिल है।
    इसलिए “हो भाषा” में परीक्षा लिख कर DSP, CO, BDO,दरोगा,सिपाही,शिक्षक आदि बन रहें हैं।
    ये अलग बात है कि कुछ एक को छोड़कर, ये लोग न समाज में भाषा विकास पर योगदान देते हैं न भाषा अंदोलनकारिओं को कोई सम्मान देते है।
  • कार्मिक,प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग,झारखंड सरकार द्वारा “हो भाषा” अनिवार्य विभागीय भाषा के रूप में मान्यता दी गईं है।
  • विश्वविद्यालय अनुदान आयोग एवं सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ इंडियन लैंग्वेजेज,मैसूर में “हो भाषा” को मान्यता प्राप्त है। इसलिए “हो भाषा” शोधार्थी वहाँ जरूर जाते हैं।
  • आकाशवाणी चाईबासा और राँची से “हो भाषा” का कार्यक्रम हो आकड़ा का प्रसारण होता है।
    ये अलग बात है कि बहुत कम लोग सुनते है।
  • “हो भाषा” साहित्य के क्षेत्र में विषेश योगदान के लिए श्री कमल लोचन कोड़ा को वर्ष 1988-89 में बिरषा भगवान ग्रंथ प्रकाशन अनुदान पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।
    ये अलग बात है कि ये बात न के बराबर लोग जानते हैं।
  •  जनरल ऑफ बिहार एण्ड ओड़िसा रिसर्च सोसायटी,पटना, जनरल ऑफ एशियाटिक सोसायटी ऑफ बंगाल,कोलकता, डायरेक्टर जनरल ऑफ आर्कियोलोजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, मैन इन इंडिया,रांची आदि सरकारी एवं तथ्यपर्क प्रकाशनों में “हो भाषा” को सम्मान प्राप्त है।
  • “हो” भाषा एक प्रमुख आदिवासी भाषा है जो मुख्य रूप से भारत के झारखंड, ओड़िशा, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ राज्यों में बोली जाती है। यह भाषा मुंडा भाषा परिवार की सदस्य है, जो ऑस्ट्रो-एशियाटिक भाषा परिवार की एक शाखा है। यहाँ “हो” भाषा के बारे में विस्तृत जानकारी दी जा रही है:
  •  भाषा परिवार:परिवार: ऑस्ट्रो-एशियाटिक

    शाखा: मुंडारी भाषाएँ

    “हो” भाषा, मुंडारी और संथाली भाषाओं से निकटता रखती है।

     

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