Ho Munda bhaasha parivaar ka praacheen vaigyaanik naam Jowar

Ho Munda bhaasha parivaar ka praacheen vaigyaanik naam Jowar

Ho Munda bhaasha parivaar ka praacheen vaigyaanik naam Jowar

Ho Munda bhaasha parivaar ka praacheen vaigyaanik naam Jowar कोल्हो मुंडा भाषा परिवार का प्राचीन वैज्ञानिक शब्द – जोवार

कोल्हो मुंडा भाषा इस दुनिया की प्राचीन भाषाओं में से एक है। इस भाषा का प्रत्येक शब्द अपने भीतर वैज्ञानिक, दार्शनिक और प्राकृतिक रहस्य छुपाए हुए है। इसी प्रकार अभिवादन का जो शब्द प्रचलित है, उसे लोग प्रायः “जोहार” कहते हैं, परंतु वास्तविक और सही स्वरूप “जोवार” है।

जोवार शब्द की व्याख्या :-
जोवार = जोवा + र
जोवा = दो या दो से अधिक
र = रक्षा, सुरक्षित, संरक्षित करना

इस प्रकार “जोवार” का शाब्दिक अर्थ है — दो या दो से अधिक लोग हाथ जोड़कर एक-दूसरे को संबोधित करें, जिससे उनका संबंध सुरक्षित, संरक्षित और मजबूत हो जाए।

संधि विच्छेद का दूसरा रूप :-
जोवार = जो + ओवर
जो = मानव, फल, जीवन
ओवर = निकालना, बचाना, रक्षा करना

इस दृष्टिकोण से “जोवार” का अर्थ है — मनुष्य-मनुष्य के बीच ऐसा संबंध बनाना जिसमें एक-दूसरे की रक्षा हो, कठिनाइयों में सहयोग हो, और दुख-सुख में साथ निभाया जाए।
सीधे शब्दों में कहा जाए तो जोवार का भाव है — मानवता को बचाना और मानव संबंधों को मजबूत करना।

वारङ चिति लिपि के अनुसार अक्षरों का अर्थ :-

ज (विज) = साहस, खुशी, निडरता, शक्ति

ओ (ओ:) = गलती, रोग, दुख

अ (अ:) = धूल, दुख, रात, अंधकार

ह (ह्यो) = क्रियाशील, गतिशील, रस्सी, जुड़ाव

र (हर्र) = रक्षा, सुरक्षा

इन सबको जोड़ने पर अर्थ निकलता है :-
“साहस रखकर गलती और दुख से लड़ना, गतिशील बने रहना, और स्वयं व दूसरों की रक्षा करना।”

दृष्टिकोणों से जोवार का अर्थ

1. वैज्ञानिक दृष्टिकोण से
प्रकृति और जीवन का आधार सह-अस्तित्व है। जैसे परमाणु मिलकर अणु बनाते हैं और जीवन को संभव बनाते हैं, उसी प्रकार “जोवार” का भाव है — साथ जुड़ना और सुरक्षा देना।

2. प्राकृतिक दृष्टिकोण से
प्रकृति में हर जीव का अस्तित्व दूसरे पर निर्भर है। पेड़, जल, वायु, पशु-पक्षी — सब आपस में जुड़े हैं। “जोवार” इसी प्राकृतिक सहजीवन का प्रतीक है।

3. दार्शनिक दृष्टिकोण से
मानव जीवन का परम कर्तव्य है — दूसरे को दुख से निकालना, उसकी रक्षा करना और संबंधों को मजबूत बनाए रखना। यही “जोवार” का दर्शन है।

4. साहित्यिक दृष्टिकोण से
“जोवार” केवल संबोधन नहीं, बल्कि आत्मीयता का गीत है। इसमें यह भाव छिपा है — “मैं तुम्हारे साथ हूँ, तुम्हारे सुख-दुख में तुम्हें नहीं छोड़ूँगा।

“जोवार” शब्द अपने भीतर गहन संदेश छुपाए है।
यह केवल अभिवादन नहीं, बल्कि मानवता का व्रत, सुरक्षा का वचन और संबंधों की मजबूती का प्रतीक है।

👉 जब कोई “जोवार” कहता है तो वह केवल हाथ नहीं जोड़ता, बल्कि यह प्रतिज्ञा करता है —
“हम दोनों का संबंध सुरक्षित रहेगा। दुख-सुख में हम साथ रहेंगे। यही मानवता का असली स्वरूप है।”

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