Janam se Mrityu tak Warang Chiti mein jeevan darshan

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जन्म से मृत्यु तक वर्णमाला में जीवन का दर्शन – हिन्दी और अंग्रेज़ी वर्णमाला
हिन्दी वर्णमाला में प्रथम अक्षर “अ” और अंतिम अक्षर “ज्ञ” है।
अंग्रेज़ी वर्णमाला में प्रथम अक्षर “A” और अंतिम अक्षर “Z” है।

हिन्दी में प्रथम अक्षर *“अ” ही क्यों है? “इ”, “उ” क्यों नहीं हो सकता?
अंतिम अक्षर *“ज्ञ” ही क्यों है? “ट”, “प”, “न” क्यों नहीं हो सकता?
अंग्रेज़ी में प्रथम अक्षर *“A” ही क्यों है? “B”, “C”, “D” क्यों नहीं हो सकता?
अंतिम अक्षर *“Z” ही क्यों है? “S”, “U”, “W” क्यों नहीं हो सकता?

👆तो उत्तर यही है कि यह क्रम केवल परंपरा का नहीं, बल्कि ध्वनियों के सरल से जटिल रूप तक के विकास का प्रतीक है।

❤️अब देखते हैं वारङ चिति लिपि वर्णमाला
वारङ चिति लिपि में प्रथम अक्षर “ङ्:(V)” है।
यह कोई साधारण चयन नहीं है, बल्कि प्रकृति और जीवन के आधार पर ठहराया गया है।

💐वैज्ञानिक दृष्टिकोण से:-
शिशु जन्म लेते ही सबसे पहले रोता है। उस समय जो ध्वनि निकलती है वह नासिक ध्वनि होती है, जो “ङ्:”(V) के समान है।
इसलिए ङ्:(V) को पहला अक्षर माना गया।

💐अर्थ की दृष्टि से:-
ङ्:(V) का अर्थ है – चमकना, बिजली, प्रभा, प्रकाश, किरण, रोशनी, गर्मी, आग।
आध्यात्मिक स्तर पर यह सूर्य का प्रतीक है।
शरीर विज्ञान में इसे दायां आंख माना गया है, क्योंकि दृष्टि ही जीवन का पहला अनुभव है।

💐अंतिम अक्षर “स(सी)” का रहस्य:-
वारङ चिति लिपि का अंतिम अक्षर “स(सी)” है।
इसे अंतिम मानने का आधार यह है कि जन्म हुआ है तो मृत्यु भी निश्चित है।

💐अर्थ की दृष्टि से:-
“स(सी)” का अर्थ है – हिंसा, दुश्मनी, चुरी, हल, कुल्हाड़ी, कुदाल, सबल, मृत्यु, निर्जीव।
यह जीवन की समाप्ति और मृत्यु का बोध कराता है।

💐आध्यात्मिक दृष्टि से:-
यह जल देवी का प्रतीक है। मृत्यु के बाद शरीर पंचतत्व में मिलकर अंततः भूमि, जल में विलीन होता है।

💐शरीर विज्ञान से:-
“स(सी)” शरीर के बाएं पैर का नाखून माना गया है।
जीवन का अंतिम अंग नाखून ही होता है, क्योंकि आंखों की चमक, हृदय की धड़कन और श्वास तो पहले ही शांत हो जाते हैं।

💐दार्शनिक दृष्टिकोण:-
ङ्:(V) जन्म और आरंभ का प्रतीक है – प्रकाश, चेतना और जीवन का पहला अनुभव।
स(सी) मृत्यु और अंत का प्रतीक है – अंधकार, निःश्वास और शांति।
इससे स्पष्ट होता है कि वारङ चिति लिपि केवल ध्वनि का क्रम नहीं, बल्कि जीवन की सम्पूर्ण यात्रा का दार्शनिक मानचित्र है।

💐प्राकृतिक दृष्टिकोण:-
जैसे सूर्योदय प्रकाश और जीवन का प्रतीक है = ङ्:(V)।
वैसे ही सूर्यास्त अंधकार और मृत्यु का प्रतीक है = स(सी)।
प्रकृति का यही नियम जन्म और मृत्यु, आरंभ और अंत का सत्य प्रकट करता है।
हिन्दी और अंग्रेज़ी वर्णमाला का क्रम ध्वनियों की सरलता और जटिलता पर आधारित है।
परंतु वारङ चिति लिपि का क्रम अद्वितीय है, क्योंकि इसमें वर्णमाला को शरीर, प्रकृति, विज्ञान, आध्यात्म और जीवन दर्शन से जोड़ा गया है।
प्रथम अक्षर ङ्:(V) = जन्म, प्रकाश, दायां आंख।
अंतिम अक्षर स(सी) = मृत्यु, अंधकार, बायां पैर का नाखून। इस प्रकार वारङ चिति लिपि यह सिद्ध करती है कि अक्षर ही शरीर और ब्रह्मांड की रचना हैं।

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