owah parivaar aur jeevan ka surakshit aashray
owah parivaar aur jeevan ka surakshit aashray “ओव:” का व्युत्पत्ति और संरचना
“ओव:” (घर) हो भाषा का अत्यंत महत्वपूर्ण शब्द है। यह केवल निवास स्थान का प्रतीक नहीं है, बल्कि जीवन, परिवार, संस्कृति और अस्तित्व की संपूर्ण व्याख्या को अपने भीतर समेटे हुए है।
यह शब्द वारङ चिति लिपि के चार अक्षरों से मिलकर बना है:
1. ॊ (ओ:) = गलती, दुख, रोग
👉 यह अक्षर हमें बताता है कि जीवन में घर से जुड़ी कठिनाइयाँ और पीड़ा अपरिहार्य हैं। घर वह स्थान है जहाँ जीवन के दुख साझा किए जाते हैं और उनका समाधान खोजा जाता है।
2. । (अ:) = धूल, रात, शाम
👉 यह प्रतीक जीवन की अस्थायीता और नश्वरता को दर्शाता है। धूल से जुड़ा भाव है—साधारणता और विनम्रता। रात और शाम का अर्थ है—आराम, विश्राम, और जीवन का अंधेरा पक्ष। घर ही वह जगह है जो इन सबके बीच संतुलन प्रदान करता है।
3. ह (ह्यो) = क्रियाशील, गतिशील, जड़, रस्सी
👉 यह जीवन की सक्रियता और परिवार को जोड़ने वाली शक्ति है। रस्सी यहाँ प्रतीक है—बंधन और एकता का। घर परिवार के सभी सदस्यों को जोड़कर रखता है, भले ही परिस्थितियाँ कठिन क्यों न हों।
4. : (य:) = अंधेरा, बिना रोशनी, सूर्य का डूबना
👉 यह मृत्यु, अंत, या कठिनाई का प्रतीक है। लेकिन घर वह स्थान है जहाँ अंधकार के बीच भी दीपक जलाया जाता है, जहाँ आशा और संबंधों की रोशनी अंधकार को परास्त करती है।
🔹 संयोजन से प्राप्त अर्थ
जब इन चारों अक्षरों को जोड़कर देखा जाता है, तो “ओव:” केवल भौतिक घर नहीं रह जाता, बल्कि वह बन जाता है—
👉 “वह आश्रय, जहाँ दुख, रोग, अंधकार और मृत्यु के बीच भी परिवार जीवन को गतिशील, सक्रिय और सुरक्षित बनाए रखता है।”
🔹 सांस्कृतिक दृष्टिकोण
ओव: केवल ईंट-पत्थर की दीवार नहीं, बल्कि परिवार और संस्कृति की आत्मा है।
यह वह स्थान है जहाँ पीढ़ियों का ज्ञान, परंपरा और संस्कार सुरक्षित रहते हैं।
हो समाज में घर (ओव:) ही सबसे बड़ा विद्यालय है, जहाँ जीवन जीने का पहला पाठ पढ़ाया जाता है।
🔹 वैज्ञानिक दृष्टिकोण
घर एक प्राकृतिक प्रयोगशाला है। दुख और रोग (ॊ) हमें संघर्ष और स्वास्थ्य की शिक्षा देते हैं।
धूल और रात (।) हमें समय के चक्र और प्रकृति की अस्थायीता का ज्ञान कराते हैं।
क्रियाशीलता और रस्सी (ह) हमें संगठन, श्रम और परिश्रम का महत्व बताते हैं।
अंधेरा और सूर्यास्त (:) हमें जीवन के अंत और पुनः आरंभ के प्राकृतिक नियमों से अवगत कराते हैं।
🔹 साहित्यिक एवं दार्शनिक दृष्टिकोण
“ओव:” वह स्थान है जहाँ प्रेम, पीड़ा, अंधेरा और प्रकाश एक साथ निवास करते हैं।
यह हमें सिखाता है कि दुख और अंधकार जीवन का हिस्सा हैं, परंतु परिवार की क्रियाशीलता और प्रेम से सब पर विजय पाई जा सकती है।
घर जीवन का प्रतीक है—आरंभ से अंत तक की यात्रा का साथी।
“ओव:” शब्द का उदाहरण यह सिद्ध करता है कि—
हो भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं है, बल्कि जीवन-दर्शन और संस्कृति की संपूर्ण व्याख्या है।
इसकी वारङ चिति लिपि हर शब्द को वैज्ञानिक, सांस्कृतिक, प्राकृतिक और दार्शनिक दृष्टि से परिभाषित करती है।
इसीलिए कहा जा सकता है कि हो भाषा वैज्ञानिक रूप से परिपूर्ण भाषा है।
👉 संक्षेप में:-
“ओव:” केवल घर नहीं, बल्कि जीवन का आश्रय है—जहाँ दुख और अंधकार के बीच भी परिवार सुरक्षित, सक्रिय और आशावान बना रहता है।
