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Chaibasa shaheed park ka itihas

Chaibasa shaheed park ka itihas

Chaibasa shaheed park ka itihas चाईबासा शहीद पार्क का क्या इतिहास है जिस हो विद्रोह के याद में शहीद पार्क का निर्माण अंग्रेजों ने ही देश आजादी के पूर्व की थी। जिसका उद्घाटन तत्कालीन बिहार,ओडिसा के गवर्नर गार्नियर मोरिस हैलेट ने 6 अक्टूबर 1937 को किया था। जिस हो विद्रोह को अंग्रेजों ने पचास साल तक […]

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Kolhan International Treaty of 1820

Kolhan International Treaty of 1820

Kolhan International Treaty of 1820 कोल्हान अंतरराष्ट्रीय संधि 1820 ई. “आप जैसा रहना चाहते हैं, वैसा ही रहिए, किन्तु आंर पंचा आठ आना प्रति हाल दीजिए” — यह शर्त थी उस अंतरराष्ट्रीय संधि की। फिर भी कोल विद्रोह के फलस्वरूप सन 1833 ई. को गवर्नर जनरल इन काउंसिल द्वारा चार्टर्ड एक्ट को उन्मूलन करने का

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Ho samaj aur bhasha sahitya par vistrt shodh lekh

Ho samaj aur bhasha sahitya par vistrt shodh lekh

Ho samaj aur bhasha sahitya par vistrt shodh lekh हो साहित्य में वर्तमान समस्याएं मैं अपना ही उदाहरण देता हूँ। मेरा मातृभाषा “हो” है। मैं बचपन से हो आषा में लोगों से बातें करते आ रहा हैं। जब मैं पढ़ने के लिए चक्रधरपुर टाउन आया, वहाँ मुझे हिंदी में बात करने में दिक्कत होता था।

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Ho Aadivasi samuday ek parichay

Ho Aadivasi samuday ek parichay

Ho Aadivasi samuday ek parichay Ho Aadivasi samuday हो साहित्य के बारे में बात करने से पहले मैं आप सभी को अपना परिचय देना चाहूंगा। मेरा नाम रबिन्द्र गिलुवा है, मैं चक्रधरपुर, झारखंड से हैं। मैं हो आदिवासी समुदाय से आता हूँ और अर्थशास्त्र में स्नातकोतर किया है। समाज सेवा के प्रति मेरी गहरी रुचि

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Transfer of Power Agreement 1947

Transfer of Power Agreement 1947

Transfer of Power Agreement 1947 सत्ता हस्तांतरण समझौता (Transfer of Power Agreement) और भारत की स्वतंत्रता भूमिका भारत की आज़ादी के बारे में आम धारणा यह है कि 15 अगस्त 1947 को देश को पूर्ण स्वतंत्रता मिल गई। लेकिन इतिहास में दर्ज तथ्यों के अनुसार यह केवल स्वतंत्रता का दिन ही नहीं था, बल्कि सत्ता

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Jaati utpatti ka bhramajaal

Jaati utpatti ka bhramajaal

Jaati utpatti ka bhramajaal “जाति उत्पत्ति का भ्रमजाल” Bharat me jaati utpatti ka bhramajaal – भारत में जातियों के नामकरण से संबंधित जितनी भी किताबें लिखी गई हैं, वे अज्ञात काल यानी तथाकथित वैदिक काल की सुनी-सुनाई बातों पर आधारित हैं. ये साहित्य आज से 150-200 वर्षों पूर्व पुस्तक के रूप में लिखा गया था.

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Ho Munda Samaj mein Bid Diri ka itihas

Ho Munda Samaj mein Bid Diri ka itihas

Ho Munda Samaj mein Bid Diri ka itihas आदिवासी समाज का इतिहास केवल लिखित ग्रंथों में नहीं, बल्कि उनके पत्थरों, परंपराओं और सांस्कृतिक चिह्नों में जीवित रहता आया है। ऐसा ही एक अमिट प्रतीक है — ‘बिड दिरि’, जो कोल-हो समाज की सांस्कृतिक पहचान, ऐतिहासिक स्मृति और सामाजिक संरचना का अहम हिस्सा है। ‘बिड दिरि’

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Sasan Diri Ho Munda samaj ka pehchan hai

Sasan Diri Ho Munda samaj ka pehchan hai

Sasan Diri Ho Munda samaj ka pehchan hai  ससन दिरि हमारे हो समाज के अदभुत पुराने ऐतिहासिक धरोहर :- ससन दिरि कोल हो समुदाय की एक अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर है। यह केवल एक पत्थर नहीं, बल्कि कोल लोगों की पहचान, आत्मसम्मान, परंपरा और सामूहिक स्मृति का प्रतीक है। यह उन मूलवासी परंपराओं की निशानी है,

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Warang Chiti is one of the oldest scripts in the world

Warang Chiti is one of the oldest scripts in the world

Warang Chiti is one of the oldest scripts in the world Warang Chiti is one of the oldest scripts in the world created for human society उक्त ‘वारङक्षिति’ के निर्माण करता “देवाँ तुरी था जो भगवान धनवन्तिर के समकक्ष माना है। इसके जीवन काल के बारे में विशेष विवरण उपलब्ध नहीं है लेकिन विभिन्न विद्वानों

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Ho Munda Bhasha Sahity ati pracheen hai

Ho Munda Bhasha Sahity ati pracheen hai

Ho Munda Bhasha Sahity ati pracheen hai हो मुन्डा भाषा साहित्य अति प्राचीन हैं साहित्य से हमारा अभिप्राय यह है कि वह प्राचीन ऐतिहासिक महत्व का हो यदि एक ओर वर्त्तमान वाणी से परि पूरित हो तो दूसरी ओर इसमें अतीत की गरिमा भी प्रतिध्वनित हो, तीसरी ओर इसी अतीत और वर्त्तमान के बल पर

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