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Ho samaj me Nage Era ka vaigyanik vyakhya

Ho samaj me Nage Era ka vaigyanik vyakhya

Ho samaj me Nage Era ka vaigyanik vyakhya 💧नगे एरा (जल देवी) हो समाज के प्रकृति-दर्शन, भाषा-विज्ञान और सृष्टि-तत्त्व का वैज्ञानिक व्याख्या 💧नगे एरा जल के रूप में विद्यमान देवी हो समाज के मत अनुसार नगे एरा कोई कल्पित देवी नहीं, किंतु स्वयं का चेतन स्वरूप है। नगे एरा प्रकृति में जल के रूप में, […]

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Ho samaj Deshauli ka vaigyanik vyakhya

Ho samaj Deshauli ka vaigyanik vyakhya

Ho samaj Deshauli ka vaigyanik vyakhya आज हम वैज्ञानिक एवं तकनीकी युग में जी रहे हैं। इस युग में वास्तविकता से मुँह मोड़कर नहीं जिया जा सकता। आज के समय में वही समाज सभ्य माना जाता है, जो प्राकृतिक नियमों और वैज्ञानिक सिद्धांतों के अनुरूप जीवन व्यतीत करता है। जब सवाल उठते हैं, तो उनके

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Barji Ho Bhasha me vaigyanik naam hai

Barji Ho Bhasha me vaigyanik naam hai

Barji Ho Bhasha me vaigyanik naam hai बरजि (गर्भावस्था) हो भाषा में वैज्ञानिक नाम हो भाषा में गर्भवती स्त्री को बरजि कहा जाता है। यह शब्द केवल एक शारीरिक अवस्था का नाम नहीं है, बल्कि दो जीवों के एक शरीर में सह-अस्तित्व का सटीक भाषिक रूप है। बरजि इसलिए कहा जाता है क्योंकि गर्भावस्था में

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Chandu ka prakriti aur vaigyanik vishleshan

Chandu ka prakriti aur vaigyanik vishleshan

Chandu ka prakriti aur vaigyanik vishleshan चांडु: (चाँद) का प्रकृति एवं वैज्ञानिक विश्लेषण हो भाषा में चाँद को “चांडु:” कहा जाता है। यह शब्द दो मूल घटकों से मिलकर बना है चां = फैला हुआ, छाया हुआ 🌕 अडो: = खोना, लुप्त होना 🌑 👉 संयुक्त अर्थ :- चांडु: वह खगोलीय पिंड है जो आकाश

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Jarom shabd ka dhatuvyutpati aur vaigyanik vyakhya

Jarom shabd ka dhatuvyutpati aur vaigyanik vyakhya

Jarom shabd ka dhatuvyutpati aur vaigyanik vyakhya जरोम(अण्डा) का धातु व्यूत्पति। वारङ चिति में निहित प्रकृति और वैज्ञानिक ज्ञान का प्रतीक। जरोम को हिन्दी में अंडा कहते हैं। अंडा वह प्रारम्भिक संरचना है, जिससे आगे चलकर नया जीवन दिखाई देता है। यह जीवन का बीज रूप है अभी दिखाई नहीं देता, लेकिन आगे सब कुछ

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Mage shabd ka vastvik arth aur vaigyanik vyakhya

Mage shabd ka vastvik arth aur vaigyanik vyakhya

Mage shabd ka vastvik arth aur vaigyanik vyakhya मगे/मासिक धर्म:-भाषा, प्रकृति और विज्ञान का समन्वय ❤️मगे का हिन्दी अर्थ मगे को हिन्दी में मासिक धर्म कहते हैं। यह स्त्री शरीर में होने वाली एक नियमित, प्राकृतिक और सृजनात्मक प्रक्रिया है, जिसका सीधा संबंध सृष्टि, जन्म और जीवन-चक्र से है। ❤️मगे :- वारङ चिति लिपि और

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Pudgal ka dhatuvyootpati aur vaigyanik vyakhya

Pudgal ka dhatuvyootpati aur vaigyanik vyakhya

Pudgal ka dhatuvyootpati aur vaigyanik vyakhya पुदगल(प्रकृति) का धातु व्यूत्पति और वैज्ञानिक व्याख्या :- आदिवासी (कोल) हो’दर्शन में प्रकृति को केवल बाहरी पर्यावरण नहीं माना जाता, बल्कि उसे जीवन, शरीर, चेतना और परिवर्तन की समग्र व्यवस्था के रूप में देखा जाता है। इसी समग्रता को हो भाषा में “पुदगल” कहा गया है। पुदगल कोई जड़

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Dunub Epill ka khagoleey vishleshan

Dunub Epill ka khagoleey vishleshan

Dunub Epill ka khagoleey vishleshan 🌟दुन्हुब इपिल्ल, कोल हो समाज की पूजा, दिशा और जीवन दर्शन का आकाशीय मूल-केंद्र। 🌟दुन्हुब इपिल्ल (ध्रुव तारा):- रात्रि आकाश में असंख्य तारे दिखाई देते हैं, परन्तु उनमें से एक तारा ऐसा है जो हमेशा लगभग एक ही स्थान पर स्थिर दिखाई देता है। हो समाज में इसे दुन्हुब इपिल्ल

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Kol Rules Ancient Culture

Kol Rules Ancient Culture

Kol Rules Ancient Culture कोल रूल आदि संस्कृति  अनुवादक-श्री लको बोदरा संस्थापक एवं संचालक आदि संस्कृति एवं विज्ञान संस्थान, पता-पासेया, अयोध्या पीढ़। एटेः तुर्तुङ पिटिका आखड़ा, झींकपानी। उपक्रमणिका :- आज तिथि 8-11-1961 ई. को दुपुब हुदा (आदि समाज ) की जागृति पर छानबीन करते हुए एटेः तुर्तुङ पिटिका आखाड़ा (आदि संस्कृति एवं विज्ञान केन्द्र) की

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Munu Dostur reya Pitika seyan

Munu Dostur reya Pitika seyan

Munu Dostur reya Pitika seyan  सेयाँ सिनिदुउर (ज्ञान का उद्गम) ओकोय तनःए ? अबु सिरजोन केन पेःए दो सदय मेनःऽ निःइ सबे तःऽ रे मेनःऽ निःइ, सबेकोय ते पुरःऽ पेःए अनिःइ, सारि सोयता निःइ, का नेलोः निःइ, साऽरन् निःइ, सबेनःऽ अदानिःइ, जी रोवा सरूब निःई दो सिंञबोंङ्गा गे तनःए। सिंञबोंङ्गा गे सिरजोन बुटा दो। एनाते

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