Ho bhasha sahitya ati pracheen hai
Ho bhasha sahitya ati pracheen hai Ho bhasha sahitya ati pracheen hai हो भाषा साहित्य की इमारत की नींव अति प्राचीन है। इसकी प्राचीनता का आभास अगस्त्य(हगाष्तो:ए) ऋषि के विंध्याचल पर्वत (बिङदोयाचल बुरु) पार करने से कई हजार वर्ष पूर्वb प्राग्वैदिक काल तक हमें मिलता है जबकि जम्बुद्विप(जम्बुडिपा) पर टुअर कोड़ा कसरा कोड़ा का अवतार…
