Ho bhasha mein piya srshti vigyan aur daarshan ka rahasy

Ho bhasha mein piya srshti vigyan aur daarshan ka rahasy

Ho bhasha mein piya srshti vigyan aur daarshan ka rahasy 1)हो भाषा की संरचना प्रकृति और ध्वनि पर आधारित है। प्रत्येक अक्षर, स्वर और अंक का संबंध किसी न किसी भौतिक या जैविक सिद्धांत से जुड़ा है। “तीन” या “पिया” संख्या केवल अंक नहीं, बल्कि जीवन-ऊर्जा के संयोग का प्रतीक है। यह दो शक्तियों के […]

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Ho bhasha me riya vigyan Sanskriti aur chetna ka sangam

Ho bhasha me riya vigyan Sanskriti aur chetna ka sangam “रिया” – संस्कृति, विज्ञान और चेतना का संगम – हो भाषा में अंक “2” को “रिया” कहा जाता है। यह केवल गणना का अंक नहीं, बल्कि जीवन और सृष्टि की जड़ में छिपा रहस्य है। “रिया” — दो का मिलन, संगम, और सृजन की प्रक्रिया

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Ho samaj aur bhasha sahitya par vistrt shodh lekh

Ho samaj aur bhasha sahitya par vistrt shodh lekh

Ho samaj aur bhasha sahitya par vistrt shodh lekh हो साहित्य में वर्तमान समस्याएं मैं अपना ही उदाहरण देता हूँ। मेरा मातृभाषा “हो” है। मैं बचपन से हो आषा में लोगों से बातें करते आ रहा हैं। जब मैं पढ़ने के लिए चक्रधरपुर टाउन आया, वहाँ मुझे हिंदी में बात करने में दिक्कत होता था।

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Ho Aadivasi samuday ek parichay

Ho Aadivasi samuday ek parichay

Ho Aadivasi samuday ek parichay Ho Aadivasi samuday हो साहित्य के बारे में बात करने से पहले मैं आप सभी को अपना परिचय देना चाहूंगा। मेरा नाम रबिन्द्र गिलुवा है, मैं चक्रधरपुर, झारखंड से हैं। मैं हो आदिवासी समुदाय से आता हूँ और अर्थशास्त्र में स्नातकोतर किया है। समाज सेवा के प्रति मेरी गहरी रुचि

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Gaya ya kinnar ke vishay me charcha

Gaya ya kinnar ke vishay me charcha “गया”(हिजड़ा,किन्नर) तीसरे लिंग का वैज्ञानिक, दार्शनिक एवं प्राकृतिक परिचय हो’ भाषा में हिजड़ा या किन्नर को “गया” कहा जाता है। यह शब्द ग(गो:)+या से बना है और वारङ चिति लिपि में इसके तीन अक्षर हैं, गो:+यो+अ: = गया 💐अक्षरार्थ गो: = रूप बदलने वाला, परिवर्तन, बदलाव, ढोना यो

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Ho bhasha ka anka

Ho bhasha ka anka हो भाषा का अंका (अंक) — जो अपने आप में वैज्ञानिक है हो भाषा का अंका, लेका, मोयोड् और तुड़: 🌍अंका (अंक) का अर्थ अंका का निर्माण “अं + का” से हुआ है। “अं” का अर्थ है सुबह की पहली किरण, जन्म, सूर्य का उगना, अंकुर का प्रकट होना। “का” का

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Pita aur uska bachcha Sanskriti pariwartan ka sach

Pita aur uska bachcha Sanskriti pariwartan ka sach पिता और उसका बच्चा: संस्कृति परिवर्तन का सच बहुत समय पहले की बात है। एक गाँव में एक पिता अपने छोटे बेटे के साथ रहता था। पिता धार्मिक और परंपरा-प्रिय व्यक्ति था। जब भी कोई पर्व या त्योहार आता, वह अपने घर के अदिञ (रसोईघर) में बैठकर

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वारङ चिति लिपि में 32 अक्षर ही क्यों?

वारङ चिति लिपि 32 अक्षर क्यों हैं? जानिए इसका खास वैज्ञानिक कारण

वारङ चिति लिपि में 32 अक्षर ही क्यों? परिचय वारङ चिति लिपि 32 अक्षर का विषय केवल भाषा का विषय नहीं है, बल्कि यह विज्ञान, संस्कृति और मानव जीवन से गहराई से जुड़ा हुआ है। दुनिया की अधिकांश लिपियाँ समय के साथ विकसित हुई हैं, जिनमें अक्षरों की संख्या किसी निश्चित वैज्ञानिक आधार पर तय

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Chara didi prakriti ke saphaikarmee

Chara didi prakriti ke saphaikarmee चड़ा दिदि प्रकृति के सफाईकर्मी कुछ साल पहले गाँवों के आसमान में गिद्धों (दिदि) का बड़ा झुंड उड़ता हुआ दिखाई देता था। गिद्ध साधारण पक्षी नहीं थे, बल्कि उन्हें लोग प्रकृति का पुजारी और गाँव का सफाईकर्मी मानते थे। गाँव में जब भी कोई पशु—गाय, भैंस, बकरी, कुत्ता या बिल्ली

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owah parivaar aur jeevan ka surakshit aashray

owah parivaar aur jeevan ka surakshit aashray

owah parivaar aur jeevan ka surakshit aashray owah parivaar aur jeevan ka surakshit aashray “ओव:” का व्युत्पत्ति और संरचना “ओव:” (घर) हो भाषा का अत्यंत महत्वपूर्ण शब्द है। यह केवल निवास स्थान का प्रतीक नहीं है, बल्कि जीवन, परिवार, संस्कृति और अस्तित्व की संपूर्ण व्याख्या को अपने भीतर समेटे हुए है। यह शब्द वारङ चिति

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