Marang bonga ka mahatva

Marang bonga ka mahatva

Maran bonga ka mahatva मरं वोङ्गा Kol Samaj Marang bonga ka mahatva – हो समाज में मरं वोङ्गा की भी विशेष रूप से रोचक कथा है। मुख्यतः मानव सृष्टि के प्रथम चरण में लुकु दम्पति दोनों एक दिन एक चबुतरे पर बैठे थे। सारे जीव जन्तुओं ने आ कर दोनो को फूलमाला से सेवा सुश्रुषा […]

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Karam Porob ka mahatva

Karam Porob ka mahatva

Karam Porob ka mahatva Kol Ho samaj Karam Porob ka mahatva लुकु दम्पति के नाती नतीनी क्रमशः दुरमी के 13 थे और सुरमी के 12 पुत्र-पुत्री थी; सयाना हो गये बुद्धिज्ञान अपना अपना हासिल कर गये। यह देख कर दुरमी ने सोचा कि शासन सत्ता का बागडोर किन को दिया जाए, दुनिया को सम्भाल सके

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janm se mrtyu tak vaaran chiti mein jeevan darshan

Jomnama ka mahatva

Jomnama ka mahatv Ho samaj me Jomnama ka mahatv-दूसरे दिन पौ फटते ही अपने पिता का पुर्नजन्म दिया। सुबह होते ही पिता जीवित हो कर दुनिया वाले को दिखाया। उसी खुशी में जोमनमा त्योहार मनाया जाता है। क्योंकि नीचे के सांस्कृतिक वाक्य से पता लगता है। एना नमा माटा नमा सुरा जोम तन नु तन

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Badtauli ka mahatva

Badtauli ka mahatva

Badtauli ka mahatva Badtauli ka mahatva यह पर्व गर्म या फसल रक्षा की है। क्योंकि कहा जाता है कि जब अपने पिता का शव लाया फिर भी दुनिया वाले उस की सच्चाई नहीं माने। आखिर “तिरिल चटा कम कोसो सोसो” के शब्दों में पौंउई और गोवाँवोड़गा का आराधना किया और शपथ लिया तथा सड़ पर्वत

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Ho Samaj Hero porob ka aitihasik ghatna

Ho Samaj Hero porob ka aitihasik ghatna

Ho Samaj Hero porob ka aitihasik ghatna यह पर्व लिटा के समय से चला आता है। जब उनके पिता सुरमी जंगली जानवर बादु के द्वारा मारे गये तो दुनिया वाले उसके वंशज समझा जाए, दुरमी के संतानों ने लिटा को बिना बाप के संतान कह कर चिढ़ाते थे। सुरमी के तीनो संतान मुटु, सेन्ताला और

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Jaati utpatti ka bhramajaal

Jaati utpatti ka bhramajaal

Jaati utpatti ka bhramajaal “जाति उत्पत्ति का भ्रमजाल” Bharat me jaati utpatti ka bhramajaal – भारत में जातियों के नामकरण से संबंधित जितनी भी किताबें लिखी गई हैं, वे अज्ञात काल यानी तथाकथित वैदिक काल की सुनी-सुनाई बातों पर आधारित हैं. ये साहित्य आज से 150-200 वर्षों पूर्व पुस्तक के रूप में लिखा गया था.

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Hermut ka mahatv

Hermut ka mahatv

Hermut ka mahatv जब भगवान देता है तो छप्पर फाड के देता है और जब लेता है तो कपाल फाड़ कर लेता है। कालक्रम के तीन संतान हुए। बिरबेन्डरकर, तयषुम और बेड़ा कडिया। अब भगवान की इच्छा हुई कि इन्हें और भी ज्ञान दिया जाए। उसने उन तीनों को अलग अलग भार सौंपा। अब देखा

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Dohm ruha hon bah

Dohm ruha hon bah

Dohm ruha hon bah दोहम रुआ होन बाह यह दोहम रूहा होन बाह पूजा, बाह का ही दूसरा रूप है। जब लुकु लड़ाई में चले गये, इधर लुकु कुड़ी प्रसव में आ गई, भाग्य से बिरवेन्डकर नामक पुत्र का जन्म हुआ। लुकु अब युद्ध में विजयी होकर लौटे, जब देखता है इधर अब एक संख्या

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Shaheed Gangaram Kalundia ka jeevanee

Shaheed Gangaram Kalundia ka jeevanee

Shaheed Gangaram Kalundia ka jeevanee “शहीद गंगाराम कालुन्डिया 4 अप्रैल 1982”पुलिस ने किस प्रकार एक वीर नायक “हो” को मार डाला / एक आदिवासी नेता गंगाराम कालुन्डिया अपने लोगों की दुःखद जीवन को और थोड़ा बेहतर बनाने के लिए उनको संगठित करने का कोशिश किया। वह एक सहासी व्यक्ति था। सन 1965 ई० भारत-चीन युद्ध

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Bah Porob kee rochak jankariyan

Bah Porob kee rochak jankariyan

Bah Porob kee rochak jankariyan  Ho samaj Bah porob kee rochak jankariyan-अब देख चुके हैं कि भवशक्ति अपने चार सन्तानों या विभागों में बाँटा गया। लेकिन यह देख लिए है कि पूजा सिर्फ तीन पुत्रों का हुआ, अब रहा पुत्री का भाग। इसी बीच लुकु दम्पति इलि के नशे मे अपने को भी भूल सा

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