Ho Literature

Bha Porob chena reya bu porobeya

Bha Porob chena reya bu porobeya

Bha Porob chena reya bu porobeya   ब्ह पोरोब का इतिहास दुपुब दोष्तुर हो कोल लोगों का जन्मसिद्ध अधिकार है, उसे मान के चलना ही हमारा धर्म है । उसे सुरक्षित रुप से मानना सब का कर्तव्य है । यह हमारी पहचान है । उसे निर्धारित समय लगन में मानना ही सत्य और लाभ दायक […]

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Ho Bhasha ka Vishesh Jankaree

Ho Bhasha ka Vishesh Jankaree

Ho Bhasha ka Vishesh Jankaree “हो भाषा” प्रगैतिहासिक काल की प्रकृति प्रदत भाषा है। “हो भाषा” ऑस्ट्रोएशियाटिक अग्नेय भाषा परिवार के भाषा है।  “हो भाषा” झारखंड,उड़ीसा और पश्चिम बंगाल में बहुतायत में बोली जाती है।  शिक्षा विभाग,बिहार सरकार के पत्रांक 2/प-101-69 शि. 3415,दिनांक 07 जुलाई 1973 द्वारा निर्गत परिपत्र की कंडिका 3 द्वारा “हो भाषा”

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Shurshuti Gowari reya orto

Shurshuti Gowari reya orto

Shurshuti Gowari reya orto Shurshuti Gowari reya orto”ओङ ज…….र…….म तिञ दो’म” ओङ – व्हरङ दाड़े – (मानव जीवन का अस्थित्व/वजूद या जीवन का कुर्सीनामा का एक छोटा रूप) ज….. (विज्) – होम्हो, ततं होमो (पवित्र आत्मा) र…… (हरर्र) – रोवा (अपुङ होमो) म…… (अम) – होमो (न:आ नमा कड् होमो) तिञ दो’म – अम ता:येते

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The Secret of Warang Chiti Ong

The Secret of Warang Chiti Ong

The Secret of Warang Chiti Ong लोग इस कहते हैं यह एक Simple Logo, Symbol हैं। कोई कहता है  प्रकृति (Nature ), सर्वशक्तिमान, ज्ञान की आँख ……… इत्यादि और  वराङ्ग चिति एक शक्ति का  प्रतीक हैं।   जब इसे हमारे लोगों ने  समाज के लिए  बनाया है तो उसके पीछे कोई Concept तो  है। Scientifically हम इसे समझने का कोशिश  करेंगे।   Science के

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Puran reya hitad

Puran reya hitad

Puran reya hitad Puran reya hitad पुराण रेय: हिनितड पुराण = पुरा + एण  (1) मुनु पुराण:- मुनुअः ओते-हासा,दः,सेंगेल, होयो,रिमिल,गामा, लोओःते अबुअः सगइ। (2) लुकु पुराण:- लुकु बुरु रे षिञहबोंगा,वोंगाकोलोओःते अबुअःसेबा-षड़ा सगइ। (3) बुइदु पुराण:- वेएद लेकाते रेएड्-रानु, जाटि-करकोम, जोनोः-चुकुउ बइ, लिजःअ तेड• उड•कुड़ु। (4) तुरि पुराण:- गइँषिरियः दानमि,बोंगाको,बिञ-मर मर,कुला-बालुकोलोओ अबुअः सगइ। (5) सतारि पुराण:-

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Kol vansh ke shaasan vyavastha

Kol vansh ke shaasan vyavastha

Kol vansh ke shaasan vyavastha Kol vansh ke shaasan vyavastha 🌍****लिटा गोसाञ****🌎 लिटा राजा कोल राजाओं के राजा थे । माना जाता है कि तीनों लोकों में उनका अधिपत्य रहा है|राजा लिटा नरसिंह रूप धारण करते थे। विश्व के पहले ओत् गुरू लिटा गोसञ थे। तांत्रिकों जैसे देंवां, सोका, दिउरि, एण इत्यादि आज भी लिटा

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Ho bhaasha vishv kee praacheen bhaashaon mein se ek hai

Ho bhaasha vishv kee praacheen bhaashaon mein se ek hai

Kol Ho bhaasha vishv kee praacheen bhaashaon mein se ek hai Ho bhaasha vishv kee praacheen bhaashaon mein se ek hai कोलहो’ मुण्डा भाषा विश्व की प्राचीनतम भाषाओं में से एक है । *इतिहास गवाह है कि ब्राह्मणो ने भारत में आकर यहां के आदिवासियों से ही लिखना पढ़ना एवं बहुत कुछ सीखा था। एवं

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Ho bhasha sahitya ati pracheen hai

Ho bhasha sahitya ati pracheen hai

Ho bhasha sahitya ati pracheen hai Ho bhasha sahitya ati pracheen hai हो भाषा साहित्य की इमारत की नींव अति प्राचीन है। इसकी प्राचीनता का आभास अगस्त्य(हगाष्तो:ए) ऋषि के विंध्याचल पर्वत (बिङदोयाचल बुरु) पार करने से कई हजार वर्ष पूर्वb प्राग्वैदिक काल तक हमें मिलता है जबकि जम्बुद्विप(जम्बुडिपा) पर टुअर कोड़ा कसरा कोड़ा का अवतार

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Ho Calender Lita Gorgonid ka Itihas

Ho Calender Lita Gorgonid ka Itihas

Ho Calender Lita Gorgonid ka Itihas पहले हमारे पुरखे चन्डु: लेनेका के द्वारा सही तिथि निर्धारित करते थे। उस समय की गणना थी तो सिर्फ चन्डु: लेनेका गोर्गोणिड् (ग्रह नक्षत्र) की। जिसका उदाहरण स्वरुप आज भी बुजुर्गों से सुनने को मिलती हैं कि – “नाअ् दो ओकोन चान्डु: सेसेन तना गा। बनो ना: दो गा

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Beliefs of Ong in Ho society

Beliefs of Ong in Ho society

Beliefs of Ong in Ho society Beliefs of Ong in Ho society ओ’ङ दो चेन: तना ? ओ’ङ क्या है ? हो’ समाज का पहचान चिह्न ओ’ङ ही क्यों ? ओ’ङ दो रोवा: रूप गे तना। ओकोना चुइलव का गोजो:चुइलव का मुचाडो: अह। (आत्मा अजर-अमर है) मनोवा होमोह बितर गोम्पय षुर्र रे नेका गे कुचा

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